मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
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मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े सामने आने के बाद सरकार ने अब उन जगहों पर निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है, जहां नशीले पदार्थों की बिक्री या सेवन की शिकायतें ज्यादा आती हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को ऐसे हॉट स्पॉट चिह्नित कर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाना अभियान की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल छिटपुट अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिला स्तर पर हर महीने इसकी समीक्षा हो और पुलिस व प्रशासन यह देखें कि कार्रवाई के बाद संबंधित इलाकों में स्थिति में कितना बदलाव आया है।
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8 महीने में 2706 मामले, 3690 आरोपी
बैठक में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 तक प्रदेश में नशीली दवाओं और मादक पदार्थों से जुड़े 2706 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 3690 आरोपियों को पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान करीब 46,313 किलो मादक पदार्थ जब्त किए गए। इन आंकड़ों के बाद सरकार का फोकस अब केवल जब्ती और गिरफ्तारी तक सीमित रखने के बजाय नशे के संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ाने पर है। अधिकारियों को हॉट स्पॉट की नियमित निगरानी के साथ वहां होने वाली गतिविधियों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
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स्कूल-कॉलेज के आसपास भी निगरानी
सरकार ने शिक्षण संस्थानों को नशे से दूर रखने के लिए उनके आसपास के क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान देने को कहा है। स्कूल-कॉलेजों की 500 मीटर की परिधि को ड्रग्स फ्री परिसर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रतिबंधित कफ सीरप की बिक्री और सप्लाई पर कार्रवाई के साथ जिलों में नशामुक्ति केंद्रों को भी सक्रिय किया जा रहा है। पुलिस और आबकारी विभाग को जरूरत पड़ने पर संयुक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा अभियान में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘नशामुक्त मित्रों’ का सहयोग लेने की व्यवस्था भी की जा रही है।
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अब हर जिले में होगी हर महीने समीक्षा
सरकार की योजना में जिला स्तर पर हर महीने समीक्षा को महत्वपूर्ण बनाया गया है। इसमें पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभाग नशे के मामलों, जब्ती, आरोपियों पर कार्रवाई और संवेदनशील इलाकों की स्थिति की समीक्षा करेंगे। नशे से जुड़ी सूचना या शिकायत के लिए 14446 नशामुक्त हेल्पलाइन भी शुरू की गई है। सरकार का जोर कार्रवाई के साथ-साथ नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार और पुनर्वास से जोड़ने पर भी है।