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Bhopal news: हमीदिया, एम्स के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, टले कई ऑपरेशन, भर्ती मरीजों की नहीं हुई मरहम पट्टी

Fri, 16 Aug 2024 08:10 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर से रेप के बाद हत्या मामले में भोपाल के हमीदिया और एम्स के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं हैं। कई ऑपरेशन टाल दिए गएं है। कल निजी चिकित्सक भी हड़ताल पर रहेंगे।
 
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हमीदिया में मरीज को स्टेचर में लेकर परेशान होते परिजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर से रेप के बाद हत्या के विरोध में देशभर में डॉक्टर्स आंदोलन कर रहे हैं। भोपाल में एम्स के रेसिडेंट डॉक्टर्स पिछले चार दिन से हड़ताल पर हैं। गुरुवार रात 12 बजे से हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर भी हड़ताल में चले गए हैं। हमीदिया अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर जाने से अस्पताल की व्यवस्थाएं बिगड़ गई है। मरीज को इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। सभी छोटे ऑपरेशन टाल दिए गए केवल मेजर ऑपरेशन किए गए। वहीं अस्पताल में भर्ती मरीजों की मलहम पट्टी तक नहीं हो पाई। कई भर्ती मरीजों को छुट्टी दे दी गई है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को सीनियर डॉक्टरों ने देखा। हालांकि सीनियर डॉक्टर भी 12 से एक बजे तक हड़ताल पर रहे और अस्पताल के बाहर पैदल मार्च निकाला। सीनियर डॉक्टर के 1 घंटे के लिए काम बंद करने के दौरान मरीज इधर-उधर भटकते रहे। कई मरीज बगैर इलाज के वापस लौट गए। 
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पीड़िता को न्याय मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन 
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संकेत सीते ने अमर उजाला से बात करते हुए कहां है कि कोलकाता में हुई घटना बेहद दुखद और परेशान करने वाली है। घटना के विरोध में सभी जूनियर डॉक्टर काम बंद कर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल जाता और डॉक्टर प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं हो जाता उनकी यह हड़ताल जारी रहेगी। मरीज को लेकर उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में हम इलाज कर रहे हैं। सीनियर डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं। 

एम्स में 4 दिन से परेशान हो रहे मरीज
इधर कोलकाता की घटना को लेकर एम्स के रेजीडेंट डॉक्टर पिछले 4 दिन से हड़ताल पर है इस वजह से यहां आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ी हुई है। एम्स प्रबंधन ने रेसिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के बाद मरीजों को उपचार देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। लेकिन कुछ सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। छोटे-छोटे ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। आपातकालीन सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। प्रदेशभर में जारी हड़ताल की वजह से ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बिगड़ने लगी है।
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हड़ताली डॉक्टरों की यह है मांग 

डॉक्टरों का कहना है कि मृतका के स्वजन को पर्याप्त मुआवजा मिले।
- घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी जांच की हो और दोषियों को कड़ा दंड मिले।
- इसके अलावा डॉक्टरों के लिए उचित सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ सभी डॉक्टरों के लिए केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम को लागू करने की मांग करते हैं।


सीनियर डॉक्टरों भी 1 घंटे नहीं किया था क्या
शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ मप्र के डॉ. राजेश टिक्स ने बताया कि पश्चिम बंगाल की महिला चिकित्सक एवं प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों के साथ मारपीट की घटना के विरोध में प्रदेश के सभी वरिष्ठ चिकित्सक दोपहर 12 से एक बजे के बीच में ओपीडी में काम बंद रखा और जूनियर डॉक्टरों के साथ पैदल मार्च निकालकर विरोध जताया है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश के सभी शासकीय 10,000 चिकित्सक हड़ताल का हिस्सा लिया, जिसमें मेडिकल कॉलेज के सीनियर फैकल्टी, स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में कार्य कर रहे सभी वरिष्ठ चिकित्सक, ईएसआई, मेडिकल अफसर मेडिकल एजुकेशन शामिल रहे।

कल से निजी अस्पतालों में भी ओपीडी रहेगी बंद
भोपाल में हमीदिया और एम्स के बाद अब निजी अस्तपतालों में भी शनिवार को ओपीडी बंद रहेगी। एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया, एमपी चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. अनूप हजेला ने बताया कि अक्षय हार्ट, नेशनल अस्पताल, हजेला, गेस्ट्रो केयर और सिद्धांता सहित शहर के कई अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी सुविधा चालू रहेगी। रूटीन ओपीडी पूरी तरह से बंद रहेगी। भोपाल के कई प्राइवेट अस्पतालों में भी दोपहर 12 से 1 बजे तक ओपीडी में मरीजों को नहीं देखा गया। पालीवाल हॉस्पिटल से डॉ. जेपी पालीवाल ने बताया कि हमने आज एक घंटे के लिए पेन डाउन किया था। इस दौरान हमने ओपीडी के मरीजों से आग्रह किया, लोगों को बताया कि वह हम ऐसा क्यों कर रहे हैं। इसके बाद मरीजों ने भी इसमें सहयोग किया। इसके अलावा हमारे यहां सभी तरह की इमरजेंसी सुविधाएं चालू रहीं।

डॉक्टरों की छुटि्टयां रद्द
इधर, जूडा की हड़ताल को देखते हुए जीएमसी के डीन डॉ. एन कविता सिंह ने सभी डॉक्टरों की छुटि्टयां रद्द कर दी हैं। इसके साथ ही मेडिकल टीचर्स को इमरजेंसी, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर, वार्ड में तैनात करने के निर्देश सभी विभागों के प्रभारियों को दिए हैं। जरूरत पड़ने पर अस्पताल में मेडिकल इंटर्न को भी तैनात किया जा सकता है।
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