परिहार आगे बताते हैं कि जनवरी से अभी तक रिजर्व में 5 से 8 वर्ष की आयु वाले तीन बाघों की मृत्यु हो गई है। पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट ने अवैध शिकार की संभावना से इनकार किया क्योंकि बाघों के शवों पर कोई जहर, करंट या चोट के निशान नहीं पाए गए। इसलिए बचे बाघों का कोरोना टेस्ट करने का निर्णय लिया गया है।
वन्यजीव विभाग के प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) आलोक कुमार बताते हैं कि बाघों की मौत का कारण जानने के लिए, पेंच टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पिछले महीने वन विभाग के प्रधान कार्यालय को पत्र लिखकर पांच बाघों के नमूने लेने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। इन नमूनों का परीक्षण कोविड -19 और अन्य वायरस के लिए किया जाएगा।
बता दें कि पिछले साल, वन्यजीव कार्यकर्ता संगीता डोगरा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर पेंच में 10 साल के बाघ की मौत की गहन जांच की मांग की थी। डोगरा का कहना था कि मुझे संदेह है कि बाघ की मृत्यु कोविड -19 की वजह से हुई है। तत्पश्चात शीर्ष अदालत ने पर्यावरण और वन मंत्रालय से मौत के कारणों का पता लगाने को कहा था। हालांकि, राज्य सरकार ने कोरोना वायरस की वजह से बाघ की मौत होने वाली बात से साफ इनकार कर दिया था।