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Court News: कांग्रेस विधायक वानखेड़े को एक साल की सजा, पुलिस पर पत्थर फेंकने के मामले में कोर्ट का फैसला

Fri, 06 Oct 2023 06:27 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल के जहांगीराबाद क्षेत्र में धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर फेंकने, पुलिस की गाड़ी को नुकसान पहुंचाने का आरोप वानखेड़े पर था। इसी मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया है।
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कांग्रेस विधायक सहित पांच को दोषी करार दिया गया है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस विधायक विपिन वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भोपाल में वानखेड़े पर एमपी एमएलए कोर्ट ने एक साल की सजा और दो हजार का जुर्माना लगाया है। जानकारी के अनुसार न्यायाधीश जयंत जैन वानखेड़े के मामले में सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। वानखेड़े के साथ ही पांच अन्य लोगों को भी दोषी करार दिया गया है। विपिन वर्तमान में आगरा मालवा सीट से कांग्रेस विधायक हैं। 
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ये है मामला 
मामला 2011 का बताया जा रहा है। 2011 में छात्र संघ के चुनाव के दौरान वानखेड़े और उनके साथियों ने भोपाल के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में अपनी मांगों को लेकर विधानसभा पर धरना प्रदर्शन किया था। इन पर धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर फेंकने, पुलिस की गाड़ी को नुकसान पहुंचाने का आरोप था। इस मामले में सुनवाई करते हुए कांग्रेस विधायक समेत कुल 6 लोगों को सजा सुनाई गई है। इनमें विवेक त्रिपाठी, विकास नंदवाना, महक नागर, संजय वर्मा और गौरव उइके के नाम शामिल हैं। 

जन आशीर्वाद यात्रा का किया था विरोध
कांग्रेस विधायक विपिन वानखेड़े इसके पहले भी कई बार चर्चाओं में आ चुके हैं। कुछ हफ्ते पहले वानखेड़े को आगर कोतवाली पुलिस ने हिरासत में लिया था। विधायक को उनके घर से अचानक कोतवाली पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर कोतवाली थाने लाया गया था उन्होंने आगर जिले में निकाली जाने वाली भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा का विरोध किए जाने की चेतावनी दी गई थी। इसी के मद्देनजर एतिहात के तौर पर पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लेकर कोतवाली थाने में नजरबंद किया गया था। 
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अपील करेंगे 
युवा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी ने कहा कि हम न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं। हम उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। हमें पूर्ण विश्वास है कि उच्च न्यायालय से हमें इंसाफ मिलेगा। भाजपा सरकार के दबाव में पुलिस ने झूठा प्रकरण दर्ज किया था।
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