को खां, गुजरात विधानसभा चुनाव के बम-बम नतीजों के बाद मोदी-शाह से भी ज्यादा खुश अपने मामा शिवराज सिंह चोहान हें। उन्होंने नतीजो पे अपनी पिरतीकिरिया में बीजेपी की इस जीत को ‘महाविजय’ बताया ओर बोले के हम भी एमपी में इसी माफिक जीत की तैयारी में जुटे हेंगे। शिवराज ये भी बोले के कहीं एसा न हो के राहुल गांधी को अब कांगरेस खोजो यात्रा निकालनी पड़ जाए। मामाजी इत्ते खुश क्यों हें, इसका जायजा सियासी जानकार ले रिए हें।
मियां, मामा शिवराज ओर साथ में पूरी भारतीय जनता पार्टी की छप्परफाड़ खुशी की कई वजहें हें। कुछ मामलों में गुजरात ओर एमपी की बात यकसी हे। गुजरात में बीजेपी 27 सालों से कुर्सी पे काबिज हे। मुखमंतरी बदलते गए पर पार्टी का राज नई बदला। हर बार वहां की पब्लिक ने बीजेपी को तखत पे बिठाया। इसके लिए तमाम नाराजगियों को ताक पे रखा। इन सत्ताइस सालों में भी 12 साल तो नरेन्द्र मोदी वजीरे आला रिए। मगर हर चुनाव में पार्टी ने सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी के दावों की चुनावों में हवा निकाल दी। इस बार लग रिया था कि पब्लिक बीजेपी से नाराज हे, लिहाजा वो दूसरी पार्टी को सूबे की कमान सोंप सकती हे। हमेशा की माफिक भाजपा ओर मोदी के खिलाफ माहोल भी बनाया गया। लेकिन गुजरात की जनता ने बीजेपी के सारे गुनाह माफ कर डाले ओर रिकार्ड जीत दिला दी।
अब मियां, अपने शिवराजजी इस वास्ते भी खुश हें के जब गुजरातियों ने 27 साल की एंटीइनकम्बेंसी को धता बता दिया तो एमपी में तो अरसा ओर भी कम हे। पब्लिक को सीधे फायदा दिलाने वाली स्कीमें ओर लागू कर दो। सब ठीक हो जाएगा। मगर इससे भी ज्यादा खुशी का सबब गुजरात के आदिवासी इलाकों में बीजेपी को मिली जीत हे। वहां 26 विधानसभा सीटें एसटी की हेंगी। इनमें से ज्यादातर बीजेपी ने जीत ली हें जबकि ये इलाका कांगरेस का गढ़ हुआ करता था। इधर एमपी में भी 47 सीटें आदिवासी के लिए रिजर्व हें। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी इनमें से सिरफ 16 सीटे ई जीत पाई थी। 30 कांगरेस के खाते में गई थीं। अब अगर गुजरात की हवा एमपी तक आई तो अगले चुनाव में आदिवासी भगवा लहराते दिखेंगे। कम से कम मामाजी तो ये ई मान के चल रिए हें। अगर पार्टी कुल आदिवासी सीटों की आधी सीटें भी जीतने में कामयाब रई तो पांचवीं बार फिर बीजेपी का परचम लेहराएगा। यह अलग बात हे के एमपी में भी लीडरशिप बदलने की मांग गाहे बगाहे उठती रेती हे। गुजरात चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी का बदलाव चाहने वाला खेमा फिर उम्मीदों से भर उठा हे। हवा बनाई जा रई हे के एमपी में बदलाव जल्द होगा।
अब खां, जमीनी हकीकत ये हे के पब्लिक में सरकार के पिरती जितनी नाराजी हे, उसके कहीं ज्यादा खुद बीजेपी में अपनी सरकार ओर उसके रहनुमाओं को लेके हे। आम कारकरता पेले की माफिक जूते घिस रिया हे। हर रोज नए ऐलान ओर वादे हो रिए हें। मगर पिछले वादों का क्या हुआ, ये मुड़कर देखने की फुरसत कोई को नई हे। पार्टी के भीतर निपटाने का खेल भी चल रिया हे। यूं तो खुश कांगरेस भी हे। गुजरात में पिटे तो क्या हुआ, हिमाचल में तो सरकार बन रई हे। इस जीत से खुश कमलनाथ बोले के एमपी में अगले चुनाव में कांगरेस की इकतरफा जीत होगी। दूसरी वजह ये के राहुल भैया मधपिरदेश के आदिवासी इलाकों में यात्रा निकाल कर आए हें। सो सब चंगा होयगा। यूं भी बेठे बिठाए खुश होने में किसी के बाप का क्या जा रिया हे।
-बतोलेबाज
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