शाम को इफ्तार दस्तरख्वान पर दसों तरह के लजीज पकवानों की मौजूदगी होगी। तरबूज, खरबूज, केला, पपीता, अनार, अंगूर, संतरा और हर मौसमी फल। साथ निभाते तरह तरह के पकौड़े और कई स्वाद के पापड़। इनके साथ कई नॉन वेज डिशेज भी दस्तरख्वान पर सजी होंगी। लेकिन इन सबको संपूर्णता और मुकम्मल बनाने वाली खास भोपाली आइटम हर घर में जरूरी माना जाता है। चना दाल, हरी मिर्च, हरा धनिया और जीरा, नमक आदि के कॉम्बिनेशन से बनाई गई खास चटनी। इस ड्राई चटनी की जोड़ पापड़ और पकोड़ों के साथ होती है। स्वाद से भरपूर और सेहत के लिए मुफीद ये चटनी कमोबेश हर वर्ग के दस्तरख्वान पर नजर आती है। शहर भोपाल में रहकर इस जायके का लुत्फ ले चुके लोग अपने शहर लोट जाने के बाद भी इस स्वाद को दस्तरख्वान से अलग करने की गुस्ताखी नहीं करते हैं। महज रमजान माह में ही इस्तेमाल होने वाली ये खास चटनी लोगों को अगले रमजान आने तक आकर्षित करती रहती है।
शीरमाल और बाकरखानी
वैसे तो भोपाल में नॉनवेज खानों के साथ शीरमाल का खास कॉम्बिनेशन हर बड़े मौके और दावत में बना रहता है, लेकिन रमजान माह में शीरमाल का उपयोग खास तौर से बढ़ जाता है। रात को नॉनवेज खानों के साथ और सुबह सेहरी के वक्त दूध या चाय के साथ इसको इस्तेमाल किया जाता है। इसका साथ देने वाले बाकरखानी और तंदूरी पराठा भी भोपाल में बहुतायत में उपयोग किया जाता है। सारे साल की खपत के मुकाबले इस माह होने वाली शीरमाल, बाकरखानी और तंदूरी पराठा की खपत कई गुना ज्यादा होती है। इसके विपरीत आम दिनों में सुबह चाय के साथ इस्तेमाल किए जाने वाले तोश, ब्रेड और बेकरी बिस्किट की बिक्री रमजान माह में बेहद कम हो जाती है।
दूध फैनी देती है तरावट
प्रदेश के अन्य शहरों के मुकाबले भोपाल की सेहरी में दूध फैनी का इस्तेमाल ज्यादा दिखाई देता है। मैदा, रवा, घी आदि के घालमेल के साथ बनाई जाने वाली फैनी को भोपाली रोजादर आमतौर पर सुबह सेहरी में दूध के साथ इस्तेमाल करते हैं। इसको लेकर मान्यता यह है कि इसके इस्तेमाल से रोजा की हालत में प्यास की शिद्दत कम महसूस होती है।
सेहरी इफ्तार के साथ ये भी
भोपाली दस्तरख्वान पर इफ्तार में नुक्ति खारे की अनिवार्यता भी है। इसी तरह इस्लामी मान्यता के मुताबिक इफ्तार के लिए खजूर का इस्तेमाल होता है। बाजार में इन दिनों कई बाहरी मुल्कों से आयातित खजूरों की बहार आई हुई है। पूरा दिन का रोजा रखने के बाद शाम को लोग डिनर में लजीज खानों की चाहत रखते हैं। इसके लिए चिकन और मटन की कई डिशेज तैयार की जाती हैं। परंपरागत सालन और तरकारी के साथ इन दिनों दिल्ली और लखनऊ के खास जायकों में शामिल नल्ली निहारी और नल्ली बिरयानी भी शामिल हैं। कबाब की कई वेरायटी भोपाल में प्रचलन में हैं, जो इफ्तार से लेकर डिनर और सेहरी तक के दस्तरख्वान पर रोजादारों का साथ निभाते दिखाई दे जाते हैं।
कुछ फास्ट फूड भी
नई जेनरेशन के स्वाद पर चढ़े फास्ट फूड का इस्तेमाल भी इफ्तार में खूब हो रहा है। चिकन पॉप कॉर्न, सैंड विच, शावरमा जैसे दर्जनों आइटम के साथ अब चिकन पिज्जा भी इफ्तार दस्तरख्वान पर नजर आता है।
दस्तरख्वान सजाने की परंपरा बरकरार
नौकरी की बंदिशों और रिश्तों के बंधन में भोपाल से विदा हुए लोग नए शहर में जाकर भी इन स्वादों से बंधे हुए हैं। इंदौर ब्याही गई भोपाल की ऐमन जफर ने सात सालों के अपने बाहरी जीवन में भी रमजान के दौरान भोपाली दस्तरख्वान सजाने की परंपरा बरकरार रखी है। नौकरी के सिलसिले में बरसों भोपाल रहे इकबाल बैग अब ट्रांसफर होकर धार चले गए हैं। लेकिन अपने साथ भोपाली स्वाद अब भी उनके किचन में मौजूद हैं। खासकर रमजान माह में सेहरी और इफ्तार का मीनू भोपाली ही होता है। आयशा करीब 28 साल पहले ब्याह कर भोपाल से उज्जैन पहुंची थीं। हर रमजान उनके भाई बशीर अहमद अब भी बदस्तूर दूध फैनी, नुक्ति खारे, शीरमाल लेकर अपनी बहन से मिलने पहुंचते हैं।
भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट