MP News: बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में न्याय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल ने युवाओं के लिए विधि (न्यायिक) जागरूकता पर जोर दिया है। वहीं, डॉ. लिजी थॉमस ने बताया कि जून 2017 से अब तक 2400 से अधिक मामलों का समाधान न्याय चौपाल के माध्यम से किया गया है
मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में 10 सितंबर को 2025 को 'न्याय संगोष्ठी 2025 - एक विमर्श : संघर्ष से न्याय की ओर' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उदय सामाजिक विकास संस्था और ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त प्रयास से हुआ।
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यह काबिले-तारीफ है- सुनीत
मुख्य अतिथि न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल ने कहा कि जहां हम कोर्ट में विधि प्रैक्टिस करते हैं, न्याय चौपाल महिलाएं इस कार्य को समुदाय तक पहुंचाने में मदद करती हैं। वे हमारी आंखें और हाथ हैं। उन्होंने युवाओं के लिए विधि जागरूकता को बेहद ज़रूरी बताया। वहीं, डॉ. कपूर ने जनता से अपील की कि वे विधि की जानकारी बढ़ाएं और उसका सही उपयोग करें। उन्होंने कहा कि न्याय चौपाल की महिलाएं बिना किसी पुरस्कार की चाहत के समाज की मदद कर रही हैं। यह काबिले-तारीफ है।
2017 से अब तक 2400 से अधिक मामलों का समाधान किया गया
इस अवसर पर उदय संस्था की निदेशक डॉ. लिजी थॉमस ने बताया कि न्याय चौपाल एक 'समुदाय आधारित कानूनी सहायता केंद्र' है। यह पहल घरेलू हिंसा सर्वाइवर्स द्वारा शुरू की गई थी। उन्होंने साझा किया कि जून 2017 से अब तक 2400 से अधिक मामलों का समाधान न्याय चौपाल के माध्यम से किया गया है।
कार्यक्रम में 600 से अधिक महिलाएं, पुरुष, बच्चे, एनएसएस और विधि के छात्र शामिल हुए। सृजन किशोरियों ने 'लैंगिक असमानता, पितृसत्ता और लिंग आधारित हिंसा' पर आधारित नृत्य प्रस्तुति दी।
न्यायाधीशअग्रवाल ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 और जरूरत पड़ने पर निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई। वहीं, तीन सर्वाइवर महिलाओं ने न्याय चौपाल से जुड़े अपने जीवन अनुभव साझा किए।मोना पुरोहित ने कहा कि समाज संघर्ष से न्याय की ओर तभी बढ़ सकता है, जब विमर्श सम्मानजनक हो।