प्रदेश भर के बीफार्मा और एमफार्मा करने वाले छात्रों का रजिस्ट्रेशन करने में पसीने छूट रहे हैं। राजधानी भोपाल स्थित फार्मेसी काउंसिल में धीमी गति से रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। पिछले 2 साल तक के रजिस्ट्रेशन पेंडिंग चल रहे हैं।आवेदक बार-बार चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। इसकी शिकायत भी कई बार हो चुकी लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा हैं। शुरुआती दौर में कहा जा रहा था कि यहां पर रजिस्टार नहीं होने की वजह से गति धीमी है, लेकिन अब यहां पर रजिस्टार की भी नियुक्ति हो गई है लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।
धूल खा रहे आवेदकों के फॉर्म
फार्मेसी काउंसिल में आवेदकों के फार्म धूल खा रहे हैं। दो से ढाई साल गुजर जाने के बाद भी आवेदकों के फार्म पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है। जिस आवेदक के फार्म में कोई कमी रह जाती है, उसे पूरा करने के लिए भी उसे कई बार चक्कर काटना पड़ रहे हैं। कुछ दिन पहले यहां हंगामा हो गया था, रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे आवेदकों के साथ सुरक्षाकर्मी ने दुर्व्यवहार किया, जिससे आवेदक नाराज हो गए और हंगामा कर दिया। मामला बढ़ता देख कार्यालय के अन्य कर्मचारियों ने हस्तक्षेप किया तब जाकर मामला शांत हुआ।
पिछले 2 साल से काट रहे हैं चक्कर
सीधी से आए राहुल शर्मा ने बताया कि उन्होंने 2023 में आवेदन किया था। लेकिन अभी तक उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। करीब 5-6 बार वह फार्मेसी काउंसिल का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन बार-बार उन्हें केवल आश्वासन दिया जाता है कि अगले महीने हो जाएगा। उन्होंने बताया कि हर बार कर्मचारियों की तरफ से कोई न कोई बहाना बना दिया जाता है, लेकिन काम नहीं हो रहा। उन्होने बताया कि मै यहां 600 किलो मीटर दूर से आता हूं। जिससे काफी पारेशानी भी होती है।
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हर बार करते हैं अलग-अलग बहाने
सागर के रहने वाले विकास ने बताया कि उन्होंने 2 साल पहले आवेदन किया था लेकिन अभी तक उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि वह इस दौरान कई चक्कर काउंसिल के काट चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें अलग-अलग बहाने बताए जाते हैं। कभी कहा जाता है आपका कॉलेज से वेरिफिकेशन नहीं हुआ है। कभी कहा जाता है कि सरवर नहीं चल रहा है। कभी गलती बताई जाती है कि फॉर्म गलत था।
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इसलिए लगता है ज्यादा समय
फार्मेसी काउंसिल के अधिकारियों का कहना है कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले आवेदक द्वारा ऑनलाइन आवेदन किया जाता हैं। जिसे काउंसिल के कर्मचारी द्वारा चैक करके आगे बढ़ाया जाता है। अगले स्टेप में बेसिक जानकारी की जांच होती है। इसमें यदि कोई कमी नहीं है तो उसे आगे बढ़ा दिया जाता है। तीसरे स्टेप में पूरे आवेदन का वेरीफिकेशन होता है। यदि कोई कमी है तो आवेदक को सूचना दी जाती है। इसके बाद अंतिम चरण में फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार का डिजिटल साइन होता है, इसमें ज्यादा समय लग जाता है।