बाल वैज्ञानिक से बात करते सीएम
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राजधानी भोपाल में शुक्रवार को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का सीएम ने शुभारंभ किया। जिसके बाद उन्होंने बाल वैज्ञानिक द्वारा बनाए मॉडल भी देखकर सराहना की। यह 4 दिवसीय आयोजन 3 से 6 जनवरी तक चलेगा, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों से 700 से अधिक बाल वैज्ञानिक, शिक्षक और मेंटर्स भाग ले रहे हैं। साथ ही गल्फ देशों जैसे बहरीन, UAE, कुवैत, ओमान और सऊदी अरब से भी बाल वैज्ञानिक अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
पारिस्थितिकी तंत्र को समझना है मुख्य विषय
इस चार दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य विषय स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को समझना है। यह कार्यक्रम बच्चों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और उन्हें समाज की समस्याओं के समाधान में नवाचार का उपयोग करने के लिए प्रेरित करेगा। कार्यक्रम के दौरान चंद्रयान मिशन, रोबोटिक्स, हाईड्रोपोनिक्स, वॉटर रॉकेटरी, पर्यावरण पर आधारित प्रदर्शनी और लोक गीत जैसे कई आकर्षक आयोजन होंगे। इसके अलावा प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. चेतन सोलंकी, डॉ. नंद कुमार और डॉ. चैतन्य पूरी बच्चों के साथ संवाद करेंगे।
सेफ्टी बैग की बटन दबाते ही पेरेंट्स को चल जाएगा पता
राजधानी भोपाल में शुक्रवार को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन शुभारंभ किया गया। इसमें देशभर के बाल वैज्ञानिक शामिल हो रहे हैं। कई बल वैज्ञानिकों ने यहां अपना स्टॉल भी लगाया है और अपना मॉडल प्रतुत किया है। ऐसा ही एक मॉडल भोपाल की एक निजी स्कूल की बालिकाओं ने बच्चियों पर बढ़ रहे खतरे को देखते हुए सेफ्टी बैग बनाया है। इस सेफ्टी बैग में एक बटन लगी है, बच्चे को खतरा मसूद होते ही वह बटन दबाएगा और उसका मैसेज पेरेंट्स के पास पहुंच जाएगा। साथ ही इस बैग में बच्चों के वजन के अनुसार उसके बैग के वजन का भी अनुमान लगाया जाएगा। इस बैक को बनाने में महज 500 का खर्चा आया है।
प्रदूषण कंट्रोल करने की बनाई डिवाइस
देश के साथ मध्य प्रदेश में बढ़ते पॉल्यूशन को देखते हुए एक निजी स्कूल के छात्रों ने एक्यूआई कंट्रोल करने की एक डिवाइस बनाई है। बच्चों का कहना है कि पराली जलाने के कारण सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है। उन्होंने पराली से होने वाले प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए एक डिवाइस बनाई है। उनका दावा है कि इस डिवाइस से प्रदूषण को कंट्रोल किया जा सकता है।