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यूपी में डॉक्टरों की कमी दूर करने को योगी सरकार का रोडमैप तैयार

Sat, 29 Apr 2017 01:55 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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योगी सरकार ने यूपी में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए रोडमैप तैयार कर लिया है। इसमें संविदा पर एमबीबीएस डॉक्टरों को रखने के साथ ही रिटायर डॉक्टरों को पुनर्नियुक्ति भी दी जाएगी।
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दुर्गम इलाकों के खाली पड़े सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को तैनाती पर उन्हें वेतन के साथ ही इनसेंटिव भी दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर रहा है। शीघ्र ही इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।

सूबे के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सबसे अधिक कमी है। जबकि, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तो डॉक्टर ही नहीं हैं। इस समय स्थिति यह है कि सूबे में कुल 18 हजार डॉक्टरों के पदों में से सात हजार पद, यानी करीब 40 फीसदी पद खाली हैं।
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इस कारण अस्पतालों में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक से नहीं मिल पा रही हैं। इसको देखते हुए  सरकार ने डॉक्टरों की कमी दूर करने का निर्णय लिया है।

स्वास्‍थ्य विभाग तैयार कर रहा है विस्तृत प्रस्ताव

- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री के निर्देश पर इन दिनों स्वास्थ्य विभाग इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है। सरकार दुर्गम इलाकों में तैनाती के लिए डॉक्टरों को वेतन के साथ ही इनसेंटिव भी देने जा रही है। यह इनसेंटिव कितना होगा इस पर अभी निर्णय होना बाकी है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के लिए बनेगा रोस्टर
अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने  रोस्टर लागू करने निर्णय लिया है। रोस्टर के तहत डॉक्टरों की एक अस्पताल के बजाय दो-तीन अस्पतालों में ड्यूटी लगाई जाती है।

यानी डॉक्टर तीन दिन एक अस्पताल और तीन दिन दूसरे अस्पताल में ड्यूटी करेंगे। इससे उन अस्पतालों में भी डॉक्टर पहुंच जाएंगे जहां अभी डॉक्टर ही नहीं हैं।
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55 जिलों में है डॉक्टरों की सबसे अधिक कमी

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि सूबे में डॉक्टरों के स्वीकृत पद के सापेक्ष सात हजार डॉक्टरों के पद खाली हैं।

सबसे ज्यादा कमी सूबे के 55 जिलों में हैं। केवल 20 जिले ही ऐसे हैं  जहां डॉक्टर पर्याप्त संख्या में हैं। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार पीएमएस से रिटायर डॉक्टरों को पुनर्नियुक्ति देने की तैयारी कर रही है।

टेलीमेडिसिन का भी होगा इस्तेमाल
सिन्हा ने बताया कि सूबे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए टेलीमेडिसिन का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। वरिष्ठ डॉक्टर टेलीमेडिसिन के जरिये दूर-दराज के मरीजों का इलाज कर सकेंगे। इसके साथ ही, मोबाइल यूनिटों से दुर्गम इलाकों में चिकित्सीय सुविधाएं भी पहुंचाई जाएंगी।
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