अपराधी गिरफ्तार हो रहे हैं और समय से चार्जशीट भी दाखिल हो रही है, लेकिन वर्षों से मामले लंबित हैं। अगर अभियोजन समय से हो तो आरोपी को जल्द सजा मिल सकती है। दोषी अपराधियों को सजा दिलाने में विवेचना-अभियोजन के बीच तालमेल बेहतर होना चाहिए।
एडीजी अभियोजन आशुतोष पांडेय ने कहा कि प्रदेश में पहले हर माह औसतन पांच हजार जमानतें निरस्त होती थीं, लेकिन अब हर माह 11 हजार जमानतें निरस्त कराई जा रही हैं। पॉक्सो एक्ट में दोष सिद्धि का प्रतिशत प्रतिमाह 51 से बढ़कर 81 फीसदी हो गया है।
वर्तमान में करीब 60 हजार मामलों में प्रतिमाह सजा हो रही है। इस वर्ष दोषमुक्त हुए सभी मामलों में गवाहों व वादियों से बुलाकर कारणों की समीक्षा की गई, जिसका डाटा राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को देकर उस पर शोधपत्र तैयार कराया जा रहा है।
लखनऊ व मुरादाबाद देश के तीन शीर्ष जिलों में
एडीजी ने बताया कि ई-प्रॉसीक्यूशन पोर्टल पर काम करने में यूपी देश के सभी राज्यों में अव्वल है। इसमें देश के तीन शीर्ष जिलों में लखनऊ पहले, जयपुर दूसरे व मुरादाबाद तीसरे नंबर पर है।
योगी ने कहा कि समय से मिला न्याय ही न्याय है। अंतर विभागीय समन्वय से दोषियों के खिलाफ बेहतर कार्रवाई हो सकती है। जिला जज के साथ डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बैठकर पॉस्को के मामले की वरीयता तय करें। इससे अपराधी को समय से दंड दिलवा सकते हैं। मुकदमों में देरी होने पर गवाह के मुकरने की आशंका रहती है और पीड़ित भी निराश हो जाता है। तत्काल सजा होने पर सकारात्मक संदेश जाता है।
प्रदेश में फोरेंसिक विवि की होगी स्थापना
सीएम ने कहा कि कोई बेगुनाह न फंसे, लेकिन कोई अपराधी भी न बच पाए। इसका ध्यान रखना होगा। सरकार महिलाओं और बच्चों के प्रति हो रहे अपराधों से निपटने के लिए 218 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित कर रही है। साइबर अपराध से निपटने के लिए हर रेंज में एक-एक साइबर थाना और फॉरेंसिक सेंटर खोला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अपना फॉरेंसिक विश्वविद्यालय भी खोलेगी। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा कि अभियोजन को लेकर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। पॉस्को के मामलों की लगातार सुनवाई की जा रही है। ई-प्रणाली लागू करने के लिए टैब व लैपटॉप दिए जा रहे हैं। डीजीपी ओपी सिंह ने कहा पॉस्को मामले में 13 जिलों में गुणवत्तापूर्ण मामलों का निस्तारण किया गया।
कार्यशाला में लॉटरी का झांसा देकर ठगी करने वाले प्रकरणों की भी केस स्टडी का प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें एक विज्ञापन नंबर से प्राप्त एसएमएस में अंकित ई-मेल से लोगों से संपर्क किया और विभिन्न बैंक अकाउंट में लोगों के पैसे जमा करके धोखाधड़ी की गई।
इसमें ई-मेल के साथ संलग्न मोबाइल नंबर की खोज तथा प्राप्त लिंक में भी ई-मेल वाला नंबर मिलने पर उस नंबर के आधार पर अपराधी को पकड़ा गया। जयपुर के साइबर विशेषज्ञ मुकेश चौधरी ने लिंक व आईपी के आधार पर और विभिन्न स्क्रीन शॉट से साक्ष्य संकलन की बारीकियों की जानकारी दी।
उन्होंने कंपनियों से सूचनाएं संकलित करने के लिए लेटर ऑफ रिक्वेस्ट के बारे में भी बताया गया।