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Lucknow News: लर्नर लाइसेंस का मेसेज मोबाइल में देख खिल उठे महिलाओं के चेहरे

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कैंप में लाइसेंस बनवातीं महिलाएं।
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लखनऊ। डालीबाग स्थित अमर उजाला कार्यालय में लगे लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस शिविर में दो दिन के भीतर 239 महिलाओं और युवतियों ने लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया पूरी की। सोमवार को शिविर के दूसरे दिन 55 महिलाओं ने आवेदन भरे और 350 रुपये की निर्धारित सरकारी फीस जमा कर पहला कदम तय किया। इससे पहले रविवार को 229 पंजीकरण हुए थे, जिनमें से 184 महिलाओं ने प्रक्रिया पूरी की थी। दो दिनों में कुल 274 रजिस्ट्रेशन हुए, जिनमें से 239 महिलाएं लाइसेंस प्रक्रिया पूरी कर चुकी हैं।
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भारी बारिश के बावजूद महिलाएं पूरे उत्साह के साथ कैंप में पहुंचीं। रविवार और सोमवार दोनों दिन जब कई लोग मौसम के चलते घरों से निकलने में हिचकिचा रहे थे, उस समय महिलाओं ने न सिर्फ घर के काम निपटाए, बल्कि समय निकालकर कैंप में पहुंचीं। कुछ छात्राओं ने कॉलेज से पहले तो नौकरीपेशा महिलाओं ने ऑफिस से पहले या बाद में आकर पंजीकरण करवाया।

जैसे ही आवेदन प्रक्रिया पूरी होने का मैसेज मोबाइल पर आता, महिलाओं के चेहरे खिल उठते। कोई परिजनों को फोन कर खुशखबरी देती तो कोई साथ आई सहेली से गले मिलकर अपनी खुशी जाहिर करती। इस पूरे अभियान में साइबर एक्सपर्ट आकाश और उनकी टीम की अंजलि गौतम ने महिलाओं का आवेदन भरने में सहयोग किया।
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छह महीने के अंदर बनवाना होता है परमानेंट लाइसेंस
साइबर एक्सपर्ट टीम ने बताया कि लर्नर लाइसेंस बन जाने के एक महीने बाद से लेकर छह महीने के अंदर परमानेंट लाइसेंस बनवाना होता है। टीम ने आवेदकों को आवेदन प्रक्रिया के सभी तौर तरीकों की भी जानकारी दी। यह भी बताया कि फेसलेस व्यवस्था से आवेदक घर बैठे डीएल से संबंधित कई कार्य करवा सकते हैं।
Iड्राइविंग लाइसेंस का पहला पड़ाव पार करने के बाद आज लग रहा है कि महिलाएं भी हर मोर्चे पर सक्षम हो रही हैं। लाइसेंस होना हमारी जरूरत और अधिकार दोनों है।I
I- शालिनी दुबे, लघु उद्यमीI

I-हमेशा लगता था कि लाइसेंस बनवाना मुश्किल और झंझट भरा काम है, लेकिन इस कैंप ने सब कुछ आसान और सम्मानजनक बना दिया। थैंक्स अमर उजाला।I
I- आयुषी सिंह, प्रतियोगी छात्राI

Iअब बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए किसी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खुद गाड़ी चला सकूं, इसके लिए लाइसेंस जरूरी था। जिसका पहला पड़ाव आज मैंने पार कर लिया। I
I- आकांक्षा गुप्ता, गृहिणीI

Iमेरे पति प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं। सुबह छोटे बच्चे को स्कूल लाना ले जाना पड़ता है। लाइसेंस नहीं होने के कारण पति सड़क पर स्कूटी लेकर जाने से रोकते हैं। अमर उजाला ने यह समस्या दूर कर दी।I
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I- दीप्ति शर्मा, गृहिणीI

कैंप में लाइसेंस बनवातीं महिलाएं।

कैंप में लाइसेंस बनवातीं महिलाएं।

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