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गन्ने की पौध तैयार कर स्वावलंबी बन रहीं महिलाएं, प्रति पौध मिल रहा डेढ़ रुपया

Sun, 04 Oct 2020 12:35 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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गन्ने की नर्सरी तैयार कीजिए, स्वावलंबी बनिए। जी हां, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को गन्ना विभाग ने रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए गन्ने की गांठ (आंख) से पौध तैयार करने का अभियान शुरू किया है। प्रदेश के 36 गन्ना उत्पादक जिलों में 714 स्वयं सहायता समूह की 6682 महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कई जिलों में महिलाओं ने नर्सरी तैयार करनी शुरू भी कर दी हैं।   

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प्रदेश में आमतौर पर गन्ने की बुवाई गन्ने को कई हिस्सों में काटकर उन्हें रोपकर होती है। अंकुरण के लिए गन्ने के हर हिस्से में गांठ या आंख होना जरूरी है। अब इन्हीं गांठ (आंख) से गन्ना की पौध तैयार कराई जा रही है। ये आंख गन्ने की दो पोरियों के जोड़ पर होती है। दरअसल, ये ही गन्ने का बीज होता है। 
 

 

 

गन्ना विभाग महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों से इन्हीं गांठों को कोकोपिट (मिट्टी भरी पॉलीथिन) में डालकर पौध तैयार करवा रहा है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एक पौध (सीडलिंग) तैयार करने के लिए 1.50 रुपया दिया जा रहा है। एक महिला प्रतिदिन डेढ़-दो सौ सीडलिंग तैयार कर 300-400 रुपये आसानी से कमा सकती है।

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बेहतर अंकुरण से बढ़ेगी उत्पादकता

आय बढ़ने से महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार आएगा तथा गन्ने की खेती में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। गन्ना एवं चीनी आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने बताया कि गन्ना बहुल क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के लिए स्वयं सहायता समूह तैयार कर उन्हें सिंगल बड एवं बड चिप द्वारा गन्ने की नर्सरी तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 31,30,151 पौध तैयार करने के साथ ही किसानों को 1,02,000 पौध वितरित की गई है।  

कई बार मौसम की प्रतिकूलता या बीज की गुणवत्ता के चलते ठीक प्रकार गन्ने का अंकुरण नहीं हो पाता है। पौध लगाने से यह समस्या दूर हो जाएगी। गेहूं की कटाई के बाद जिन किसानों की गन्ना बुवाई समय से नहीं हो पाती है, उन्हें भी नर्सरी से पौध लेने पर विलंब से बुवाई की समस्या से काफी हद तक मुक्ति मिल जाएगी।

 पिछले साढ़े तीन वर्षों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है। उन्हीं के निर्देश पर महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों से गन्ना नर्सरी तैयार कराई जा रही है। इससे हजारों महिलाओं के लिए स्वावलंबन के अवसर बढ़ेंगे। किसानों को भी लाभ होगा।  - सुरेश राणा, मंत्री, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग 
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