माना जा रहा है कि वोटों के ध्रुवीकरण और बदलाव की चाह में मतदान केंद्रों पर वोटरों की लाइनें लगी रहीं।
11 सीटों पर मतदान में अमरोहा, मुरादाबाद और नगीना अव्वल रहे जबकि पीलीभीत और बदायूं फर्स्ट डिवीजन में पास होने से चूक गए।
पहले चरण में मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और अलीगढ़ मंडल में पड़ने वाली 11 जिलों की 10 सीटों पर 64.38 फीसदी वोट थे। दूसरे चरण में बुधवार को 11 सीटों पर 62.69 फीसदी मतदान रहा। यह वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव से 7.60 फीसदी ज्यादा है।
आमतौर पर दूसरे चरण में मतदान का रुझान पहले चरण जैसा ही रहा। कई सीटों पर कहीं जातीय कहीं धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण नजर आया।
ज्यादा मतदान वाली अमरोहा, मुरादाबाद और नगीना जैसी सीटों पर ही नहीं, दूसरे क्षेत्रों में भी ध्रुवीकरण का रुझान दिखा।
इस ध्रुवीकरण का लाभ किसे मिलेगा, यह तो 16 मई के बाद पता लगेगा लेकिन मतदान व्यवहार में चुनावी मुद्दे पीछे छूटते दिखाई दिए। दूसरे चरण की अधिकांश सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक माना जाता है।
गैर भाजपा दलों में इस वोट बैंक को लेकर आखिर तक मारामारी दिखी। मतदाताओं ने किसके पक्ष में ईवीएम के बटन ज्यादा दबाए इसे लेकर अलग-अलग दावे हो सकते हैं लेकिन आमतौर पर बदलाव का वोट शांतिपूर्वक पड़ा।
एक और खास बात यह रही कि सर्वाधिक वोटर सूरज चढ़ने पर सवेरे नौ से दोपहर एक बजे के बीच मतदान के लिए पहुंचे। पांच बजे के बाद केवल 3.83 मतदान हुआ।