लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी में जुटे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपना अगुआ नीतीश कुमार को मान लिया है? यह सवाल सुर्खियों में हैं। क्योंकि उनके कार्यालय पर लगे पोस्टर से तो यही संदेश जा रहा है। हालांकि पार्टी मीडिया सेल ट्विटर हैंडल से इसकी व्याख्या यूपी की 80 और बिहार की 40 लोकसभा सीटों को जोड़कर की गई है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी में पूरी तत्परता से लगे हैं। जिस तरह से विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोटबैंक बढ़ा है, उससे उम्मीद है कि वह लोकसभा चुनाव में अपनी सीटें बढ़ाने में कामयाब रहेगी। इसी के तहत वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के साथ विभिन्न दलों को लामबंद करने की कोशिश में जुटे हैं। इस बीच बिहार में घटनाक्रम बदला। भाजपा से नाता तोड़कर अलग हुए नीतीश कुमार ने न सिर्फ राजद का हाथ थामा बल्कि तेजस्वी यादव को उप मुख्यमंत्री बनाने के बाद 2024 के लिए सक्रिय हो गए हैं।
उन्होंने दिल्ली जाकर समाजवादी आंदोलन के अगुआ रहने वाले सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के साथ ही लालू प्रसाद यादव, शरद यादव सहित अन्य नेताओं से भी मुलाकात की। उन्होेंने आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, हरियाणा में इनेलो नेता ओमप्रकाश चौटाला, कर्नाटक के पूर्व सीएम एच डी कुमारस्वामी, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, सीपीआई नेता डी राजा से मुलाकात की। उन्होंने एक नई लकीर खींचने की कोशिश की है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की अगुवाई में गंठबंधन होने की दुहाई दी है। उन्होेंने स्वीकार किया था कि यूपी सियासी लिहाज से बड़ा राज्य है। ऐसे में इस सच्चाई से भी इनकार नहीं किया जा सकता है राष्ट्रीय फलक पर नीतीश कुमार खुद को प्रधानमंत्री पद के दावेदार होने का संकेत भी दे रहे हैं। दूसरी तरफ अखिलेश यादव 2024 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुटता की बात कह रहे हैं, लेकिन यह एकजुटता नीतीश की अगुवाई में होगी, इससे बच रहे हैं।
पोस्टर से मची हलचल
इस बीच शनिवार को सपा कार्यालय के सामने पार्टी के प्रवक्ता आईपी सिंह ने एक पोस्टर लगा दिया। इस पोस्टर पर नीतीश कुमार के साथ अखिलेश यादव की फोटो है। लिखा है यूपी प्लस बिहार - गई मोदी सरकार। इस पोस्टर के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। अहम सवाल यह उठ रह है कि क्या अखिलेश यादव ने नीतीश कुमार को 2024 के लिए नेता मान लिया है? क्या वह नीतीश कुमार के पीछे चलने के लिए तैयार है? क्योंकि अभी तक इस संबंध में अखिलेश यादव का कोई बयान सामने नहीं आया है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं और बिहार में सिर्फ 40। वह बार- बार केसीआर और ममता बनर्जी का नाम लेते रहे हैं।
इस संबंध में सपा प्रवक्ता आईपी सिंह का कहना है कि समाजवादियों को एकजुट करने का यह प्रयास है। इससे कार्यकर्ताओं को लामबंद करने में कामयाबी मिलेगी। सपा मीडिया सेल के ट्वीटर हैंडल से पोस्ट किया गया कि यूपी की 80 और बिहार की 40 सीटें मिलकर कुल 120 सीटें हैं। इन्हीं 120 सीटों पर खेल होगा। इन्हीं 120 सीटों पर भाजपा हारेगी। 2024 इन्हीं 120 सीटों पर सपा, राजद, जेडीयू मिलकर भाजपा को हराएंगे। यूपी में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा ही भाजपा हो हराएगी।