जिले में बीते पांच वर्षो में 140 लड़के व लड़कियों का अपहरण हो चुका है। पुलिस द्वारा इनमें से 120 को बराबद किए जाने का दावा भी किया जा रहा है पर इसके बावजूद कई बच्चे व किशोरियां ऐसी है जिनके बारे में पुलिस को अभी तक कुछ पता नहीं लग सका है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी बच्चे व युवक, युवती के अपहरण के मामले में तत्काल रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही त्वरित कार्रवाई की जाती है।
बताते चलें कि वर्ष 2010 से लेकर 2015 के फरवरी माह तक जिले के विभिन्न थानों में करीब 140 नाबालिग लड़के व लड़कियों के अपहरण व गुमशुदगी के मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
इन मामलों में अपहरण हुए कई ऐसे बच्चे व किशोर किशोरियां है जिन्हें पुलिस अभी तक तलाश नहीं सकी है। वहीं कुछ की तो अपहरण के बाद हत्या भी की जा चुकी है। घर से गायब बच्चों की आने की उम्मीद लगाए परिवारीजन सिर्फ उनके वापस आने की राह ही ताक रहे है जबकि वह कब लौटेंगे यह बताने वाला कोई नहीं है।
अपहरण के बाद हुई छात्र की हत्या, नहीं मिला शव
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम मसूदपुर निवासी संतोष शर्मा के पुत्र दुर्गेश का बीते दो अगस्त 2014 को अपहरण हो गया था। दुर्गेश कक्षा 8 का छात्र था। इस मामले में अपहरणकर्ताओं ने पीड़ित परिवार से 15 लाख रुपये की फिरौती भी मांगी थी।
करीब 6 माह बाद पुलिस ने इस वारदात का खुलासा कर पांच लोगों को जेल भेजा और बताया गया कि छात्र की हत्या कर शव नहर में फेंका गया था। इसके बावजूद दुर्गेश का शव आज तक नहीं बरामद हो सका है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के शुगरमिल रोड के एक मोहल्ला निवासी 15 वर्षीय एक किशोरी का 13 दिसंबर 2014 को अपहरण हो गया था। पीड़ित ने इस मामले में देवा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बचनूपुरवा निवासी पवन के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसके बाद भी अभी तक आरोपी को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है और न ही किशोरी का ही पता लगा सकी है।
जबकि पीड़ित पिता का कहना है कि वह आए दिन पुलिस अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहा है उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वहीं देवा कोतवाली क्षेत्र के बम्भनपुरवा निवासी महादेव का 12 वर्षीय पुत्र पंकज वर्ष 2011 में लापता हो गया था जिसका आज तक पता नहीं लग सका है।
इसी तरह सफदरगंज थाना क्षेत्र में ग्राम गुरेला निवासी दीनबंधु वर्मा का पुत्र मनीष जो कि कक्षा 10 का छात्र था का बीते 15 जुलाई को अपहरण हो गया था जिसका आज तक पता नहीं लग सका है। पिता दीनबंधु वर्मा ने बताया कि वह पुलिस से अपने पुत्र को बरामद करने की बात कहकर थक चुके है। कहा अब भगवान चाहेंगे तभी बेटा वापस घर लौटेगा।
पुलिस की है ये प्रतिक्रया
पुलिस विभाग में अपहरण होने वाले बच्चों की तहकीकात के लिए एक मिसिंग सेल का गठन है। इसका प्रभारी एक इंस्पेक्टर को बनाया जाता है व इसमें कई पुलिस कर्मी भी तैनात है। जिले में किसी भी थाना क्षेत्र में होने वाले अपहरण की सारी डिटेल इस सेल में उपलब्ध होती है। पुलिस अधिकारी कहते हैं कि गुमशुदा व अपहरण के मामलों में उचित धारा में रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाती है।
एएसपी डा. ओपी सिंह का कहना है कि अपहरण व लापता बच्चों व युवक-युवतियों को खोजने के लिए पुलिस द्वारा टीम का गठन किया जाता है। डीसीआरबी के माध्यम से लापता के बारे में पूरे प्रदेश व अन्य प्रदेशों के थानों में भी उसका फोटो समेत अन्य विवरण भेजा जाता है।
इसके साथ ही अपह्त के पोस्टर बनवाकर सार्वजनिक स्थलों पर लगाने के साथ ही विभिन्न समाचार पत्रों व टेलीवीजन में भी अपह्त के बारे में भी जानकारी प्रकाशित करवाई जाती है। अपहरण के किसी भी मामले में गायब व्यक्ति हो या नाबालिग उसे तलाशने का पुलिस द्वारा बराबर प्रयास किया जाता है।