लेखपालों के तबादलों में भेदभाव के आरोप को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर हुई है। इस पर अदालत ने सरकार से पूछा है कि लेखपालों के तबादलों को लेकर क्या नीति अपनाई जा रही है?
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह आदेश राम स्वामी व अन्य की याचिका पर दिए। याचिका में कहा गया कि कई लेखपालों जिनकी तैनाती के 11 महीने से लेकर ढाई वर्ष हुए हैं, उनका अन्यत्र स्थानांतरण कर दिया गया जबकि आठ-दस साल से एक ही जगह जमे कई लेखपालों को नहीं हटाया गया।
इस पर सरकारी वकील ने दलील दी कि तबादले प्रशासनिक आधार पर किए गए हैं। याचियों ने जिस फिरोजाबाद जिले का मुद्दा उठाया है, वहां निर्धारित संख्या 50 की जगह 73 से अधिक लेखपाल तैनात हैं।
वहीं, कई लेखपाल मनचाहे स्थान पर तैनाती के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील निर्देश हासिल कर बताएं जिनकी तैनाती लंबे अरसे से एक ही जगह पर है, उनके तबादले के लिए क्या नीति है। कोर्ट ने सरकारी वकील को इस मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।