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बच्चों पर मौसमी बीमारियों का वार, सर्जरी के लिए भी इंतजार

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बच्चे इन दिनों डेंगू, वायरल, टायफायड जैसी बीमारियों से त्रस्त हैं। वहीं अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की सर्जरी भी उनके मौसमी बीमारियों की चपेट में आने की वजह से टालनी पड़ रही है। अकेले केजीएमयू में ही ऑपरेशन के लिए आने वाले कुल बच्चों में से एक तिहाई की सर्जरी मौसमी बीमारियों के कारण अनफिट होने से टालनी पड़ रही है।
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कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच केजीएमयू में इस समय ओपीडी और सर्जरी की तारीखें मिलने में काफी समस्या हो रही है। ऐसे में एक बार सर्जरी की तारीख टलने पर दोबारा फिर लाइन लगानी पड़ती है। राजधानी में इन दिनों अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना चार से पांच सौ मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों की भी अच्छी खासी तादाद है। कई बच्चों को तो भर्ती कराने तक की नौबत आ रही है। एक महीने पहले ही केजीएमयू में सामान्य सर्जरी की शुरुआत हुई है। इसकी वजह से बच्चों के विभिन्न रोगों की सर्जरी के लिए लंबी वेटिंग हो गई है। इस समय जब उनका नंबर आ रहा है तो वे किसी अन्य मौसमी बीमारियों की वजह से अनफिट पाए जा रहे हैं।
इस समय हो रहे 150 से करीब ऑपरेशन
केजीएमयू में सामान्यत: पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में हर महीने 150 के करीब सर्जरी होती हैं। मगर इस समय बच्चों के अनफिट होने की वजह से इनकी संख्या सौ के करीब रह गई है। बच्चों के अचानक अनफिट होने की वजह से दूसरे मरीज को तारीखें भी नहीं दी जा रही हैं, क्योंकि सर्जरी से पहले विभिन्न जांचें करानी होती हैं।
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पीडियाट्रिक विभाग में रोजाना दो सौ से ज्यादा की ओपीडी
केजीएमयू के पीडियाट्रिक विभाग में दो सौ से ज्यादा बच्चों की ओपीडी होती है। इसमें पीडियाट्रिक मेडिसिन में करीब 150 तथा पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में 50 बच्चे रोज आते हैं। इस समय कोरोना क ी वजह से अस्पतालों की ओपीडी में अधिकतम संख्या निर्धारित की गई है। इस वजह से यह संख्या अभी कम है।
कोरोना संक्रमण के बाद से लगातार सर्जरी हो रही है। बीमारी की वजह से जो बच्चे ऑपरेशन के लिए अनफिट होते हैं उनकी सर्जरी टालना मजबूरी है। ऐसे बच्चों को नई तारीख दे दी जाती है।
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- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू
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