लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के न्यूरो सर्जरी विभाग में बेड की भारी कमी के कारण मरीजों की जान आफत में है। आलम यह है कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी भर्ती के लिए लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका मर्ज और दर्द दोनों बढ़ता जा रहा है।
ताजा मामला लखनऊ निवासी संतोष कुमार पांडे का है। 20 मार्च को ओपीडी में दिखाने के बाद 27 मार्च को उनकी एमआरआई रिपोर्ट में ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सर्जरी न हुई तो आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। इतनी गंभीर स्थिति होने पर जब मरीज ने भर्ती होने की गुहार लगाई तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि 44 मरीज पहले से ही वेटिंग लिस्ट में हैं। डरे हुए परिजनों का कहना है कि एक तरफ डॉक्टर जानलेवा बीमारी का डर दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इलाज देने में हाथ खड़े कर रहे हैं।
बेड कम, लोड ज्यादा
न्यूरो सर्जरी विभाग में 120 बेड हैं, जिनमें से 56 ट्रॉमा सेंटर और बाकी शताब्दी फेज-2 में हैं। विभाग के प्रमुख डॉ. बीके ओझा के मुताबिक, बेड की तुलना में मरीजों का दबाव कहीं अधिक है। रोजाना 70 से ज्यादा नए मरीज आते हैं और कम से कम 10 को तत्काल ऑपरेशन की जरूरत होती है। संसाधनों की कमी के कारण केवल इमरजेंसी केस ही प्राथमिकता पर लिए जा रहे हैं।
केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने आश्वासन दिया है कि यदि किसी विशेष मरीज की भर्ती में समस्या आ रही है, तो उसका संज्ञान लेकर समाधान निकाला जाएगा।