सत्ता के स्वयंवर की तैयारी तेज हो चली है। बरातियों यानी मतदाताओं पर आहिस्ता-आहिस्ता चुनावी रंग चढ़ने लगा है। कैसा रंग-ढंग है इन बरातियों का उससे रूबरू कराने से पहले बात चुनावी समरांगण की। उसके भूगोल और इतिहास की। 2017 की बात करें तो यूपी में पड़ने वाले इन चार जिलों की चुनावी समरभूमि में भगवा ही छाया था। 18 में से 17 सीटों पर भाजपा का परचम फहराया था। बात 2012 की करें तो कहानी इसके बिल्कुल उलट थी। तब दो ही सीट मिली थीं भाजपा को। बसपा को आठ, सपा को चार, कांग्रेस को तीन सीटें मिली थीं, तो रालोद को एक। इस बार चुनाव किसी के लिए भी आसान नहीं है। फिलहाल भाजपा और सपा-रालोद के बीच मुकाबला जोरदार दिख रहा है। बसपा और कांग्रेस भी पूरा जोर लगाए है। दिल्ली से नजदीक होने के कारण आम आदमी पार्टी भी पूरी सक्रियता दिखा रही है।
गाजियाबाद : कानून व्यवस्था तो सुधरी
अब बात मतदाताओं की। मिजाज की थाह लेने के लिए ‘अमर उजाला’ की टीम गाजियाबाद से साहिबाबाद, लोनी, मुरादनगर होते हुए मोदीनगर तक पहुंची। पहला पड़ाव आरडीसी रहा। यहां एक चाय की दुकान पर कुछ युवा सियासी चर्चा में मशगूल थे। युवा अधिवक्ता ऋषि कुमार दलील देते हैं- देखिए, प्रदेश में भ्रष्टाचार और अपराधियों पर तो लगाम लगी है, इससे इनकार नहीं कर सकते। पर, यह भी सच है कि किसान आंदोलन को ठीक से हैंडल नहीं किया गया। कानूनों को वापस ही लेना था, तो थोपे ही क्यों गए? इस बीच चर्चा में पेशे से इंजीनियर सुनील कुमार भी शामिल हो गए। कुल्हड़ में चाय की चुस्की लेते हुए बोले, भाई किसानों का मुद्दा एक फैक्टर हो सकता है, लेकिन कानून-व्यवस्था को भी तो देखो। सपा सरकार से तो बेहतर है। तभी बीच में नीरज कूद पड़े और महंगाई का सवाल उछाल दिया। इंजीनियर सुनील ने कहा कि महंगाई तो थोड़ी-थोड़ी ही ऊपर चढ़ रही है। 2014 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी 74 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल मिल रहा था।
महंगाई और छुट्टा पशुओं से परेशानी
विजयनगर सेक्टर-9 में थाने की बगल वाली रोड पर चाय की दुकान पर भी कुछ लोग चर्चा में मशगूल मिले। सुदीप साहू कह रहे थे कि हम शहरों में भले रहे हों, लेकिन ज्यादातर का ताल्लुक गांवों से है। किसान आंदोलन, महंगाई और छुट्टा पशुओं से खेती को नुकसान इस बार मुद्दा बनेगा। मवई के रहने वाले सुरेंद्र ने उनकी बात को काटते हुए कहा, महंगाई प्रदेश सरकार के हाथ में थोड़े ही है। सड़कें देखो, पहले से अच्छी हुई हैं। विजयनगर में 20 साल से जिस धोबीघाट पर आरओबी की मांग हो रही थी, वह भी पूरी होने ही वाली है।
बेरोजगारी को लेकर नाराजगी
साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में हम वसुंधरा सेक्टर-9 पहुंचे। यहां हमें कोरोना में नौकरी छूटने से बेरोजगार हुए मिट्ठू कुमार मिले। चर्चा छिड़ते ही रोजगार के सवाल हो लेकर उनकी नाराजगी सतह पर आने लगती है। वह कहते हैं, दो करोड़ नौकरी हर साल देने का वादा जुमला निकला। 12 साल की नौकरी अचानक कंपनी बंद होने की वजह से चली गई। वहीं, पास खड़े वाणी सिंह महंगाई को लेकर सवाल उठाते हैं। कड़कड़ मॉडल के अर्जुन टेबल पर चाय का कप रखकर कहते हैं, कोरोना ने निसंदेह प्रवासियों को बेहद खराब दिन दिखाए। वह इस दौरान के हालात बताते हुए सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हैं।
लोनी नहीं बनी लंदन
लोनी में मुस्लिम और गुर्जर वोट निर्णायक माने जाते हैं। सपा, बसपा और कांग्रेस में मुस्लिम वोटों को लेकर खींचतान है। तीनों दलों में टिकट के लिए मुस्लिम दावेदारों की लंबी लाइन है। बहरहाल, लोनी तिराहा के पास रेडीमेड गारमेंट की दुकान पर मिले जय किशोर लोहरा बताते हैं, विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा विकास कार्य तो नहीं हुए हैं, फिर भी मुकाबला भाजपा और गठबंधन के प्रत्याशियों में ही रहेगा। तभी दुकानदार राकेश बोले, भाजपा ने लोनी को लंदन बनाने का सपना दिखाया था, लेकिन एक भी समस्या को खत्म नहीं कर पाई। कांग्रेस नेता सचिन पायलट के ननसाल गांव सकलपुरा में बैठे ग्रामीणों के बीच भी चर्चा चुनाव की ही चल रही थी। स्थानीय निवासी रविंद्र कसाना कहते हैं, भाई सरकार ने वादे तो बहुत किए, पर खेती-किसानी के लिए कुछ नहीं किया। जीत कुमार, अनिल कुमार, राजू और यशपाल भी कुछ ऐसा ही मानते हैं। पर, उन्हें उम्मीद है कि हिंदुत्व के आधार पर भाजपा सत्ता में वापसी कर सकती है।
मुफ्त राशन, दवा, पीएम आवास का भी असर
मुरादनगर में रेलवे रोड पर चाय की चुस्कियां लेते मिले मुकेश शर्मा प्रदेश सरकार के कामकाज से खुश नजर आए। वह कहते हैं, योगी की सरकार ने बहुत विकास कार्य किए। जाम की समस्या खत्म कर दी। एक्सप्रेसवे बन गए। गुंडागर्दी कम होगई है। कुलदीप उर्फ बिट्टू भी हां में हां मिलाते हुए कहते हैं कि गरीबों-मजदूरों को मुफ्त राशन और इलाज भी तो दिया है सरकार ने। कोरोना में लोगों के रोजगार तो छूटे, लेकिन खाली पेट कोई नहीं रहा। ब्रजेश, हरज्ञान उन्हें याद दिलाते हैं, गरीबों के मकान भी तो बनवा दिए, यह काहे भूल रहे हो। ढाई-ढाई लाख रुपये दिए मकान बनाने के लिए। दुकान पर शेरदीन और इरशाद भी मैदान में उतर आए। वे कहते हैं, सपा-रालोद गठबंधन और भाजपा में कांटे की टक्कर होगी। मामला एकतरफा कतई नहीं है।
कोई तारीफ कर रहा, तो गन्ने के बकाये का उठा रहा मसला
अंतिम पड़ाव मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र रहा। मोदीनगर रेलवे स्टेशन के पास एक ट्रैवल्स एजेंसी के बाहर लोग बैठे मिलेे। चुनावी चर्चा छिड़ते ही दीपक गेरा और अभयराम केंद्र व राज्य सरकार के कामों की तारीफ में जुट जाते हैं। तभी भोला, अजीत पाल और श्याम लाल ने बेरोजगारी और महंगाई का सवाल उठा दिया। कुलदीप भी बोल पड़े, मोदी शुगर मिल पर किसानों का 250 करोड़ रुपये गन्ने का बकाया है। इसको लेकर किसानों में नाराजगी है। मोदीनगर के ही रहने वाले अजय और राजू मानते हैं कि टक्कर भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी में ही होगी।
बुलंदशहर : गठबंधन ने बदले समीकरण
बुलंदशहर जिले में सात विधानसभा सीटें हैं। बुलंदशहर सदर सीट का मिजाज जानने के लिए हम डीएम रोड की तरफ बढ़े। यहां मिले पूनम यादव और धर्मराज सिंह बताते हैं कि इस बार माहौल कुछ बदला-बदला नजर आ रहा है। रजत और सुनीता ने भी उनकी हां में हां मिलाई। उन्होंने कहा, इस बार भाजपा के लिए मुश्किलें तो बढ़ी ही हैं। सपा-रालोद गठबंधन होने से समीकरण बदले हैं। बसपा की भी स्थिति पहले से बेहतर है।
कांग्रेस की बढ़ी सक्रियता पर भी नजर
शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र के मोहल्ला कोट शेरखां निवासी ललित शर्मा विधायक के कामकाज पर थोड़ा नाखुश दिखे। वहीं, रघुराज सिंह, हरद्वारी लाल, पप्पू सैनी कहते हैं, यह सच है कि मुफ्त राशन, गरीबों को शौचालय और मुफ्त इलाज की योजना का लाभ लोगों को बिना भेदभाव के मिला है। हालांकि, वे यह भी कहते हैं, कांग्रेस के नेता अपना संकल्प पत्र गांव-गांव सुना रहे हैं। महिलाओं में इसका असर भी दिख रहा है। प्रियंका गांधी के बुलंदशहर में सम्मेलन करने के बाद कांग्रेसियों की सक्रियता बढ़ी है।
विधायक से नाराजगी का भी असर
सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पास कबाड़ी की दुकान पर लोग जमा थे। माहौल जानने के लिए हम भी वहां पहुंच गए। हाजी नवाब और हाजी शरीफ कुरैशी कहते हैं, विधायक के खिलाफ नाराजगी सरकार के कामों पर भारी पड़ रही है। अजीज कुरैशी और मोहम्मद असलम किसान आंदोलन और सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, इस बार मुस्लिम वोट बंटेगा नहीं। उसके साथ ही जाएगा जो भाजपा को हराएगा। विजय और राघव का मानना था कि महंगाई और बेरोजगारी सरकार के काम पर भारी पड़ रही है। हालांकि, वे यह भी जोड़ते हैं वोट डालते समय लोग महंगाई जैसे मुद्दों को भूल जाते हैं।
बदला-बदला सा है माहौल
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ डिबाई में अनाज मंडी में हमें मिले रमेश प्रधान और यतीश चंद्र बताते हैं, इस बार माहौल बदला-बदला है। ऐसे में कौन जीतेगा, इसका आकलन आसान नहीं है। सुरेश चंद्र तायल, विमल शर्मा, विटोन वार्ष्णेय, सुरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि किसान इस बार बड़ा मुद्दा हैं। हालांकि, रमेश और सुरेश का कहना था कि कानपुर में नोटों का खजाना पकड़े जाने के बाद माहौल बदल रहा है।
कांटे की टक्कर के आसार
अनूपशहर विधानसभा क्षेत्र के कलां बाजार में गारमेंट्स की दुकान पर अतुल शर्मा, डॉ. रमेश चंद शर्मा, सौरभ वार्ष्णेय और विकास गर्ग मिले। वे कहते हैं, योजनाओं से गरीबों को फायदा पहुंचा है। गरीबों को मुफ्त राशन मिला। प्रमोद गर्ग, चंद्रपाल प्रजापति, संजय वार्ष्णेय और लक्ष्मण शर्मा भी उनकी हां में हां मिलाते रहे। मुकाबला किसके बीच होगा, इस सवाल पर वे कहते हैं, इस बार चुनाव एकतरफा नहीं होगा।
सरकार के कामकाज को तौल रहे लोग
खुर्जा में एक चाय की दुकान पर मिले नंदकिशोर और प्रिंस इस बात से खुश नजर आए कि पॉटरी उद्योग को ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना में शामिल किया गया है। जेवर एयरपोर्ट के बनने से भी क्षेत्र में विकास होगा। पर, नईमुद्दीन अहमद, महावीर सैनी और रहमान ठाकुर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, सपा और भाजपा के कार्यकाल की तुलना होगी। मुकाबला इन दोनों में ही रहने वाला है। हालांकि, बसपा भी यहां मजबूत है। वहीं, स्याना के प्रकाश मार्केट में मिले विकास बंसल और दिनेश कुमार बताते हैं कि फल पट्टी के किसानों को उचित दाम नहीं मिले। तेजेंद्र सिंह और कृष्ण कुमार जीएसटी से कारोबार पर पड़ रहे असर को लेकर सवाल उठाते हैं। दीपक गोयल, अनिल कुमार, जीवेश का कहना था कि सरकार ने व्यापारी वर्ग को छोड़कर सबको लाभ पहुंचाया है।
गौतमबुद्धनगर
कोरोना काल के कामकाज को भी परख रहे लोग
नोएडा के व्यावसायिक क्षेत्र में दुकान चलाने वाले बबलू शर्मा राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं। बबलू कहते हैं, व्यवसायियों में सुरक्षा की भावना बढ़ीहै। कोरोना संक्रमण काल में भी भाजपा के कार्यकर्ताओं ने जिस तरह लोगों की मदद की, वह काबिल-ए-तारीफ है। एक नामचीन कंपनी के पास चाय की दुकान चलाने वाले रविंद्र कुमार शुक्ला भी कुछ इसी तरह की दलीलें देते हैं। अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के अध्यक्ष व उद्यमी ललित ठुकराल कहते हैं कि नोएडा का खूब विकास हुआ है। वादे कितने पूरे हुए, इसका भी आकलन कर रहे लोग गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण के दौरान हुए विवाद की वजह से चर्चाओं में आई दादरी विधानसभा सीट पर चुनावी माहौल गर्म है। दादरी में मिले स्थानीय निवासी सुरेंद्र भाटी नेताओं के वादों को पूरा नहीं करने से नाराज हैं। रामसिंह का कहना था कि स्थानीय युवाओं को कंपनियों में रोजगार नहीं दिया जा रहा है। क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ रही है। उन्हें रोकते हुए नरेंद्र सिंह बोल पड़े कि किसानों की स्थानीय मांगें भी प्रशासन नहीं पूरी कर रहा है।
जेवर एयरपोर्ट को लेकर दिलचस्पी
बीते दिनों सबसे बड़े एयरपोर्ट का शिलान्यास कार्यक्रम की वजह से चर्चाओं में रहे जेवर विधानसभा क्षेत्र में भी चुनाव में वोटरों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। यहां मिले जुगेंद्र सिंह छौकर सरकार की मजबूत पैरवी करते नजर आए। छौकर कहते हैं, भ्रष्टाचार और अपराध पर लगाम लगी है। अभी छौकर बोल ही रहे थे कि विनोद चौधरी भी सरकार की उपलब्धियां गिनाने लगे। वह कहते हैं, पांच साल में जेवर के साथ-साथ पूरे प्रदेश में विकास के काम हुए हैं। नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन औरंगजेब अली उनसे नाइत्तफाकी जताते हैं। वे कहते हैं, पांच साल में न तो वादे के मुताबिक रोजगार मिला और न भ्रष्टाचार खत्म हुआ। महंगाई की मार अलग से परेशान कर रही है।
हापुड़ : महंगाई, किसानों के मुद्दों पर मुखर हैं लोग
हापुड़ विधानसभा क्षेत्र के व्यापारी नेता टुक्कीराम गर्ग कहते हैं, व्यापारियों के साथ आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं। कई महत्वपूर्ण मामलों के खुलासे अटके हैं। धनौरा निवासी किसान सतवीर त्यागी का कहना है कि वादे के अनुसार गन्ना के बकाये का भुगतान नहीं किया। मोहल्ला शिवपुरी निवासी विकास गर्ग कहते हैं, लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो रही हैं। अस्पतालों में बेहतर सुविधा मिले तो कुछ हालात सुधरें। गांव असौड़ा के फुरकान कहते हैं, वोट उसे करेंगे जो रोजगार की बात करेगा और क्षेत्र के विकास की बात करेगा। जिला बनने के बाद भी हापुड़ तरक्की की दौड़ में पीछे है।
कानून-व्यवस्था से भी हो रहा आकलन
गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा क्षेत्र के गांव बदरखा के किसान सुभाष कहते हैं, विकास तो हुआ है, लेकिन आम लोगों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया। गढ़ के संजय चौहान का कहना है कि गन्ना का बकाया भुगतान अटका पड़ा है। ब्रजघाट का विकास भी नहीं हो पाया। रसूलपुर के जतिन खाद की किल्लत से परेशान नजर आए। उनका कहना था कि किसान आंदोलन का असर चुनाव पर दिखेगा। हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है। वहीं, 2017 की लहर में भी भाजपा धौलाना में हार गई थी। सपनावत गांव में हमें मिले विजय सिंह चुनावी चर्चा छिड़ते ही धौलाना रोड के गड्ढों का सवाल उठा देते हैं। वहीं पिलखुवा के मंडी निवासी दिनेश गर्ग कहते हैं कि महंगाई लगातार बढ़ रही है। कपड़ों पर जीएसटी से कारोबार चौपट हो गया।