पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की राजनीतिक पकड़ बहुत मजबूत है और वह पूर्व मंत्री भी रह चुका है। वह धनबल से सम्पन्न कुख्यात अपराधी है जिसके प्रभाव में चित्रकूट की महिला रिपोर्ट दर्ज कराने की बात से इन्कार कर रही है।
गोमतीनगर थाने में पूर्व मंत्री व उसके साथी आशीष शुक्ला के खिलाफ दर्ज कराए गए मामले के विवेचक ने पूर्व मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि करते हुए कोर्ट में रिपोर्ट दी।
सीजेएम संध्या श्रीवास्तव ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अक्तूबर की तारीख नियत की है। इसके पहले मामले के विवेचक पंकज कुमार सिंह ने कोर्ट को दी अपनी रिपोर्ट में बताया कि 17 अगस्त को उसे पता चला कि चित्रकूट की महिला गौतमपल्ली वाले मामले में गवाही देने के लिए पाक्सो एक्ट की विशेष कोर्ट में आई है।
इस पर विवेचक ने पाक्सो एक्ट की विशेष कोर्ट से वादिनी का हस्ताक्षर नमूना लेने की अनुमति मांगी तथा वादिनी से हस्ताक्षर का नमूना देने को कहा। लेकिन बार-बार अनुरोध के बाद भी महिला ने हस्ताक्षर का नमूना नहीं दिया। विवेचक ने पूरी बातचीत रिकार्ड कर अपनी रिपोर्ट के साथ कोर्ट में पेश की। विवेचना समाप्त करने की रिपोर्ट में सिंह ने कहा कि उनके द्वारा की विवेचना से स्पष्ट है कि वादिनी ने ही अपने हस्ताक्षर से गोमती नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
चूंकि आरोपी प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति है जो कि धन बल से मजबूत और कुख्यात अपराधी है लिहाजा संभव है कि वादिनी डर से या उसके किसी प्रभाव में आकर सही तथ्यों से इन्कार कर रही है। विवेचक ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति व आशीष शुक्ला के खिलाफ भेजी गई चार्जशीट में लगाए गए आरोपों का समर्थन किया। साथ ही कोर्ट से आरोपियों को कड़ा दंड देने का अनुरोध किया है।