कोरोना महामारी के बावजूद बच्चों का सामान्य टीकाकरण जारी रखना चाहिए। बच्चों के लिए निर्धारित टीकाकरण से न सिर्फ संबंधित बीमारी से बचाव होता है बल्कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। इसकी वजह से बच्चों में क्रॉस इम्युनिटी विकसित होती है और कोरोना जैसे संक्रमण से भी बचाव होता है। विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल 12 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों के लिए ही कोविड टीका आया है। ऐसी सूरत में इससे कम उम्र के बच्चों के लिए रेगुलर टीकाकरण बहुत जरूरी है।
डॉक्टरों के अनुसार पहले साल में बच्चों को लगने वाले टीके समय से लगने बेहद जरूरी हैं। इसमें एक-दो हफ्ते की देरी चल सकती है, लेकिन ज्यादा देरी सही नहीं है। नियमित टीकाकरण न होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इससे नई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, सामान्य टीकाकरण से बढ़ी हुई इम्युनिटी बच्चों को कोरोना के खिलाफ जंग में और मजबूती दे सकती है। 15 महीने के बाद ज्यादातर टीके बूस्टर होते हैं। ये टीके बच्चे में पहले से मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता को और बढ़ाते हैं। इनमें एक-दो महीने की देरी भी हो तो कोई परेशानी नहीं है।
हर महीने आठ हजार बच्चों को कोरोना टीका
जिले में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान कई महीने बच्चों का सामान्य टीकाकरण अभियान बंद रहा था। अब यह फिर से शुरू हो गया है। सामान्य दिनों में लखनऊ जनपद में हर महीने लगभग आठ हजार बच्चों को विभिन्न बीमारियों के टीके लगते थे। टीकाकरण की यह रफ्तार अब फिर से चालू हो गई है।
टीकाकरण का समय
जन्म के समय- टीबी से बचाव के लिए बीसीजी, हेपेटाइटिस बी की पहली डोज और ओरल पोलियो ड्रॉप।
- डेढ़ माह पर- पेंटा वैक्सीन वन, न्यूमोकोकल, रोटा वायरस, आईपीवी।
- ढाई माह पर- पेंटा वैक्सीन-2, न्यूमोकोकल, रोटा वायरस, आईपीवी।
- साढ़े तीन माह पर- पेंटा वैक्सीन-3, न्यूमोकोकल, रोटा वायरस, आईपीवी।
- नौ माह पर- एमआर वैक्सीन, जेई, विटामिन ए की डोज।
- डेढ़ वर्ष पर- डीपीटी का बूस्टर, एमआर-2, जेई।
- साढ़े चार वर्ष- डीपीटी बूस्टर-2, एमआर-2
- 5-6 साल- डीपीटी बूस्टर-2
- 10 साल- टिटनस टोक्साइड/ टिटनस एंड एडल्ट डिप्थीरिया
- 16 साल- टिटनस टोक्साइड / टिटनस एंड एडल्ट डिप्थीरिया
विशेषज्ञों की राय
अभी 12 वर्ष से कम आयु वर्ग के लिए कोरोना टीका नहीं आया है। वहीं सामान्य टीकाकरण जारी है। बच्चों के लिए कोविड टीका भले नहीं आया हो पर सामान्य टीकाकरण से भी उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, इसलिए बच्चों का टीकाकरण जरूर कराना चाहिए।
- प्रो. जेडी रावत, विभागाध्यक्ष पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग केजीएमयू
सामान्य तौर पर दिए जाने वाले टीके विशिष्ट बीमारियों से लड़ने के लिए होते हैं। इनसे उन रोगों से तो बचाव होता ही है साथ ही क्रॉस इम्यूनिटी भी विकसित होती है। यह इम्युनिटी कोरोना से लड़ने में भी मददगार होती है।
- डॉ. पयाली भट्टाचार्य, बाल रोग विशेषज्ञ पीजीआई
कोरोना की दूसरी लहर की वजह से टीकाकरण कुछ समय के लिए रोका गया था। अब यह पूरी रफ्तार से जारी है। अभिभावकों को अपने बच्चों को टीका जरूर लगवाना चाहिए। इससे उनमें रोगों से लड़ने की ताकत मिलेगी।
- डॉ. एमके सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी