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सियासत: पुराने बसपाइयों के साथ से समाजवादियों में उत्साह, इस चुनाव में बहुमत मिलने की उम्मीद जताई

Sat, 15 Jan 2022 09:31 AM IST
शाहरुख खान चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा के काडर नेताओं में शुमार तमाम दिग्गज भाजपा में चले गए थे। इसका तानाबाना स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी, दारा सिंह चौहान जैसे नेताओं ने बुना था। 
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बसपा के बाद भाजपा नेताओं के साथ आने से सपाइयों की बांछें खिल गई हैं। एक-एक कर बसपा की पृष्ठभूमि के ज्यादातर नेता सपा में आ चुके हैं। कुछ के जल्द ही आने की संभावना है। 10 मार्च को आने वाला चुनाव परिणाम उस दौर की तरह दिखेगा या नहीं यह तो वक्त बताएगा, लेकिन पार्टी की महिला सभा की राष्ट्रीय सचिव चिंतादेवी, अंबेडकर वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर चौधरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता कैप्टन आशुतोष वर्मा समेत कई सपाई पार्टी को बहुमत मिलने की उम्मीद जता रहे हैं।
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पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा के काडर नेताओं में शुमार तमाम दिग्गज भाजपा में चले गए थे। इसका तानाबाना स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी, दारा सिंह चौहान जैसे नेताओं ने बुना था। अब ये सभी भाजपा को छोड़कर सपा में आ चुके हैं। इसी तरह कांशीराम के सहयोगी रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री केके गौतम भी अब सपा के साथ हैं और सुरक्षित सीटों पर फोकस किए हैं। 

बसपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके इंद्रजीत सरोज, लालजी वर्मा, रामअचल राजभर, असलम चौधरी, हाकिमलाल बिंद सहित 15 विधायक भी सपा में आ चुके हैं। बसपा और कांग्रेस में बचे कुछ और वरिष्ठ नेताओं के भी सपा में आने की चर्चा है। पुराने बसपाइयों के साथ आने से सपाइयों का उत्साह बढ़ गया है। बसपा के दिग्गज नेता भी सपा के साथ हैं, जिसका सियासी फायदा पार्टी को मिलना तय है।
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पार्टियों को 1993 में इस तरह मिले थे वोट
वर्ष 1993 के चुनाव परिणाम को देखें तो वर्ष 1993 में हुए चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन को 177 सीटें मिली थीं। इनमें सपा को 17.94 फीसदी, बसपा को 11.62 फीसदी, जनता दल को 12.33 फीसदी, जनता पार्टी को 0.52 फीसदी और कांग्रेस को 15.08 फीसदी वोट मिले थे। अन्य दलों को 19.42 फीसदी और निर्दलीयों को 6.81 फीसदी वोट मिला था। भाजपा को अकेले 33.30 फीसदी वोट मिला था।
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दलितों-पिछड़ों नहीं, सर्व समाज का अघोषित गठबंधन : जयशंकर

पुराने बसपाइयों और समाजवादियों के एक मंच पर आने को सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय इसे सर्व समाज का अघोषित गठबंधन बताते हैं। कहते हैं कि इसे सिर्फ दलितों, पिछड़ों के गठबंधन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। 

विनय शंकर तिवारी, जय चौबे, राकेश राठौर जैसे बड़ी संख्या में ब्राह्मण और राजपूत जाति के नेता भी सपा के साथ आए हैं। इसका फायदा मिलना तय है। उन्होंने कहा कि जो भी संघ परिवार के खिलाफ है, वह सपा के साथ है।

इस बार भाजपा बनाम अन्य का चुनाव : रीछपाल
समाजवादी नेता रीछपाल चौधरी कहते हैं कि वर्ष 1993 में एक लहर थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के असरकारी न होने की कई वजह थी। पर अब हालात बदल चुके हैं। यह चुनाव पूरी तरह से भाजपा बनाम अन्य का है। बसपा के सारे नेता सपा के साथ हैं। 

प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह के अलावा छोटी-छोटी पार्टियों के नेता भी साथ आ गए हैं। वे कहते हैं कि जिस तरह के हालात इमरजेंसी के बाद बने थे, कुछ ऐसा ही इस बार दिख रहा है। उस दौर में लोगों ने जिस तरह से चौधरी चरण सिंह पर निगाह लगाई थी। उसी तरह से इस बार सभी अखिलेश यादव की ओर देख रहे हैं।
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