उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) भी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के तर्ज पर काम करेगी। उसे भी किसी की तलाशी लेने और संदिग्ध को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा। दरअसल, कुछ लोगों को भ्रम है कि यूपीएसएसएफ को जो अधिकार दिए गए हैं, उससे लोगों का उत्पीड़न बढ़ेगा।
मगर ऐसा नहीं है। क्योंकि सीआईएसएफ अधिनियम 1968 में भी बिना वारंट गिरफ्तारी और तलाशी का प्रावधान है। अर्थात सीआईएसएफ के अधिकारी भी बिना मजिस्ट्रेट के अनुमति के ऐसे लोगों को गिरफ्तार करती रही है, जिनकी गतिविधियां संदिग्ध रही हैं।
सीआईएसएफ पर हमला करने, हमले का प्रयास करने या हमले का भय दिखाता है तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। इतना ही नहीं, सीआईएसएफ के कार्यों में बाधा उत्पन्न करने वालों को गिरफ्तार करने का उसे हक है। ठीक इसी तरह के अधिकार यूपीएसएसएफ को भी दिए गए हैं।
सीआईएसएफ महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों जैसे हवाई अड्डा, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, अयोध्या में रामजन्म भूमि, मेट्रो रेल आदि की सुरक्षा में लगी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी तरह महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, न्यायालयों, हवाई अड्डे, मेट्रो व प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए यूपीएसएसएफ का गठन किया है। जाहिर है इसका मसौदा भी सीआईएसएफ के आधार पर तर्ज किया गया है। उधर, उड़ीसा व महाराष्ट्र की स्पेशल फोर्स एक्ट भी सीआईएसएफ एक्ट की ही तर्ज पर हैं।