यूपी दूसरे राज्यों को अपनी पुलिस फोर्स उपलब्ध नहीं कराएगा। इस बाबत डीजीपी मुख्यालय ने मौखिक रूप से गृह मंत्रालय के अधिकारियों को जानकारी दे दी है। कहा, प्रदेश की पुलिस फोर्स में डेढ़ लाख से अधिक अफसर व सिपाही और पीएसी में लगभग 73 कंपनियों के बराबर जवानों की कमी है। ऐसे में दूसरे राज्यों को फोर्स भेजने पर अगर यहां कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है, तो निपटना मुश्किल होगा।
गृह मंत्रालय ने गुजरात व हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे चुनाव के मद्देनजर यूपी से पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने के संबंध में पूछा था। सूत्रों का कहना है कि डीजीपी मुख्यालय से इस बाबत कहा गया है कि प्रदेश में पुलिस फोर्स की भारी किल्लत है। लिहाजा गुजरात व हिमाचल प्रदेश को पुलिस फोर्स मुहैया कराना मुश्किल होगा। जवाब में डीजीपी मुख्यालय ने प्रदेश में होने वाले निकाय चुनाव का भी हवाला दिया है।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के निकाय चुनाव में केंद्रीय बल मिलने की संभावना बेहद कम है। क्योंकि पूर्व मेें स्थानीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव में केंद्र ने बहुत कम फोर्स उपलब्ध कराई थी। इस बार भी केंद्र से अधिक फोर्स मिलने की उम्मीद न के बराबर है। ऐसे में प्रदेश पुलिस को अपने संसाधनों से ही चुनाव कराना है।
पीएसी के पास विभिन्न जोन व सेक्टर में मिलाकर कुल 273 कंपनियां होती थी। वहां अब घटकर 200 रह गई है। सूत्रों का कहना है कि इसकी वजह यूपी 100 को उपलब्ध कराई गई फोर्स है। इसमें 2,500 ड्राइवर से लेकर अन्य कर्मचारी शामिल हैं। बाकी 200 में से 27 कंपनियां काशी, अयोध्या, मथुरा और आगरा में लगी हुई हैं और 173 कंपनियां प्रदेश के विभिन्न जिलों में आने वाली कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व रहती हैं।