मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अफसरशाही पर भरोसा व काम के लिए भरपूर समय देने का फार्मूला कारगर साबित हुआ। नतीजा ये हुआ कि टीम योगी ने संस्थागत सुधारों पर जमकर प्रयोग किए। इसका असर ये हुआ कि सरकार के प्रयोगों से सरकारी लाभ सीधे जनता तक पहुंचे, जिसका सीधा फायदा विधानसभा चुनाव में नजर आया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रिजल्ट देने वाले अफसरों पर भरोसा और अड़ंगेबाज अफसरों को साइडलाइन बनाने के फार्मूले पर काम किया। इसके अंतर्गत योगी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर गृह, वित्त, लोक निर्माण, औद्योगिक विकास, शिक्षा, राजस्व व सूचना सहित तमाम प्रमुख विभागों में अफसरों को लंबे-लंबे समय तक तैनाती दी। मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों की टीम ने गवर्नेंस में सुधार व विभागों को दिए गए टास्क को समय से पूरा कराने की जिम्मेदारी निभाई। ई-पॉश मशीन से राशन वितरण की पहल हो या लाभार्थी के खाते में सीधे धनराशि हस्तांरण के लिए एकाउंट खोलवाने की कार्रवाई। ई-ऑफिस, ई-प्रमाणपत्र, ई-टेंडर की पहल हो या ई-बजट जैसी सुविधाओं की पहल मुख्यमंत्री कार्यालय के देखरेख में ही पूरी हो पाई। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में कामयाबी मिली, जो चुनाव में सबसे कारगर साबित हुआ।
विपक्ष बकाया गन्ना मूल्य भुगतान व किसान आंदोलन को मुददा बनाता रहा। पर, पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी व सत्ताधारी दल के अन्य नेता गन्ना मूल्य बकाये की रिकार्ड अदायगी व पीएम किसान सम्मान निधि से धन हस्तांतरित करने की उपलब्धि गिनाकर इन मुद्दों से पार पा गए। विपक्ष कोविड काल में गरीबों की दुश्वारियों को उठाता रहा लेकिन सत्ता पक्ष मुफ्त टीकाकरण, मुफ्त राशन वितरण की याद दिलाकर आगे बढ़ने में सफलता पा ली। ये काम संस्थागत सुधारों की वजह से ही संभव हो पाए।
इसी तरह विपक्ष कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाता रहा। इस मोर्चे पर भी लगाए गए अफसरों ने बेहतर काम किया। स्कूली बच्चियों से लेकर महिलाएं तक खुलकर कानून-व्यवस्था में सुधार की गवाही देती नजर आईं। इसी तरह अन्य तमाम सुधार भी चुनाव में बड़े काम के साबित हुए।