उत्तर प्रदेश लिवर उपचार एवं प्रत्यारोपण का हब बनेगा। इसका फायदा प्रदेश के मरीजों के साथ पड़ोसी राज्यों और नेपाल के मरीजों को भी मिलेगा। उपचार की व्यवस्था के बाद अब प्रत्यारोपण पर फोकस किया जा रहा है। इसके लिए सरकार सभी मेडिकल कॉलेजों में इमरजेंसी एवं ट्रामा सेंटर की शुरुआत करने पर जोर दे रही है। इसके जरिए तीमारदारों की काउंसिलिंग कर ब्रेन डेड होने वाले मरीजों के अंगदान कराए जाएंगे। दान में मिलने वाले लिवर सहित अन्य अंग जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किए जाएंगे। इसका नेतृत्व एसजीपीजीआई में स्थापित राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटा) करेगा।
प्रदेश में एसजीपीजीआई, केजीएमयू, लोहिया संस्थान और एमएलएन मेडिकल कॉलेज प्रयागराज में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग चल रहा है। इस साल एसजीपीजीआई में प्रदेश का पहला हेपेटोलॉजी विभाग भी शुरू हो गया है। इन विभागों की ओपीडी में हर दिन आठ सौ से एक हजार मरीज उपचार कराते हैं। सरकार अगले साल तक छह अन्य मेडिकल कॉलेजों में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग शुरू करने की तैयारी में है। इससे नए गैस्ट्रोलॉजिस्ट तैयार किए जा सकेंगे। इसी तरह लिवर प्रत्यारोपण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। एसजीपीजीआई में एक मरीज में लिवर का प्रत्यारोपण हो चुका है।
तीन मरीजों को भर्ती कर जांच की जा रही है। जल्द ही इन मरीजों में लिवर का प्रत्यारोपण होगा। एसजीपीजीआई हर माह एक मरीज का लिवर प्रत्यारोपण करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। केजीएमयू में 14 मरीजों का लिवर प्रत्यारोपण किया जा चुका है। उधर, लोहिया संस्थान लिवर प्रत्यारोपण की तैयारी कर रहा है। निजी क्षेत्र में अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल दो किडनी प्रत्यारोपण कर चुका है। दो मरीज भर्ती किए गए हैं। मेदांता भी लिवर प्रत्यारोपण की तैयारी कर रहा है। लखनऊ में आए अन्य कॉरपोरेट अस्पताल भी लिवर प्रत्यारोपण की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
दान में मिले लिवर से मरीजों को राहत देने की तैयारी
एसजीपीजीआई में स्थापित सोटा ने प्रदेश के 27 मेडिकल कॉलेजों की चेन बनाया है। इसके जरिए सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के ब्रेन डेड होने पर उनके परिजनों की इच्छा व सहमति से लिवर, गुर्दा, ह्रदय, फेफड़े और पैन्कियाज दान कराया जाएगा। ये अंग जरूरतमंदों में प्रत्यारोपण कराया जाएगा। प्रदेश में अभी लिवर और किडनी पर ही जोर है। एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान का नेटवर्क तैयार कर लिया गया है। मेडिकल कॉलेजों को जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि लाइव रिलेविट डोनर कार्यक्रम डिजिज्ड लाइव ट्रांसपोर्ट प्रोग्राम शुरू होने से अंगदान की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को राहत मिलेगी। सरकारी क्षेत्र में अभी तक लिवर प्रत्यारोपण का सबसे बड़ा केंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलेरी साइंसेस नई दिल्ली है। दूसरे स्थान पर पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ है। अब उत्तर प्रदेश में एसजीपीजीआई भी इन दोनों संस्थानों की तर्ज पर लिवर प्रत्यारोपण कार्यक्रम चलाने की तैयारी में है। प्रयास है कि चिकित्सा संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों को आपस में जोड़कर प्रदेश को अंग प्रत्यारोपण का सबसे बड़ा केंद्र बनाया जाए।
दबे पांव फैल रहा है फैटी लिवर रोग : डॉ. आकाश
एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आकाश माथुर ने बताया कि लिवर में अतिरिक्त वसा बनना ने फैटी लिवर की समस्या होती है। शराब पीने वालों को यह समस्या ज्यादा होती है। इसी तरह मोटापा, चिकनाई युक्त भोजन, डायबिटीज आदि भी इस समस्या को बढ़ाती है। फैटी लिवर होने पर लिवर में सूजन, लिवर स्कारिंग (सिरोसिस), लिवर कैंसर, लिवर फेल होना आदि शामिल हैं। जब लिवर काम करना बंद कर देता है तो उसमें अंतिम विकल्प प्रत्यारोपण है। फैटी लिवर से 5 से 20 प्रतिशत तक भारतीयों के प्रभावित होने का अनुमान है। फैटी लिवर होने पर पेट के दाहिनी ओर दर्द होना, थकान, मतली, भूख न लगना, आंखों का पीलापन आदि शामिल है।
हेपेटाइटिस बी, सी खराब कर रहा लिवर : डॉ. अनिल
केजीएमयू के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल गंगवार बताते हैं कि लिवर खराब करने की बड़ी वजह हेपेटाइटिस बी व सी है। अब इसकी दवाएं केजीएमयू सहित अन्य अस्पातलों में निशुल्क दी जा रही है। त्वचा व आंखों के पीला पड़ने, मूत्र का रंग गहरा होने, पेट दर्द बना रहने, खुजली बढ़ने, पेट फूला हुआ महसूस होने पर चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय से हेपेटाइटिस का इलाज कराकर लिवर को बचाया जा सकता है। इसी तरह मोटापा का ध्यान रखना जरूरी है। इससे बचने के लिए हर दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम जरूर करना चाहिए।
हर साल दो लाख लोगों की मौत : डॉ. अंकुर
केजीएमयू गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकुर यादव ने बताया कि खानपान और बदली जीवनशैली की वजह से हर दिन लिवर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। साल भर पहले ओपीडी में हर दिन औसतन डेढ़ सौ मरीज आते थे। वहां अब तीन सौ मरीज आ रहे हैं। देश में हर साल करीब दो लाख लोगों की लिवर की बीमारी से मौत होती है। करीब 50 हजार लोगों को प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। यूपी में करीब एक हजार से अधिक लोग लिवर प्रत्यारोपण के इंतजार में हैं।