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यूपी: प्रदेश में हो सकता है खाद संकट, विक्रेताओं ने दी 15 अगस्त के बाद दुकानें बंद करने की चेतावनी

Thu, 14 Aug 2025 12:13 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Fertilizer crisis in UP: यूपी में खाद का संकट हो सकता है। प्रदेश के खाद विक्रेताओं ने 15 अगस्त के बाद दुकानें बंद करने की चेतावनी दी है। 

 
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पूरे प्रदेश में चल रहा है खाद संकट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन की मंगलवार को लखनऊ के एक होटल में हुई बैठक में 15 अगस्त के बाद किसी भी कंपनी की खाद नहीं खरीदने का फैसला लिया गया। थोक विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि उनका सरकारी मशीनरी और कंपनियां दोनों उत्पीड़न कर रही हैं। बैठक में प्रस्ताव पारित करके कृषि निदेशक को भी भेजा गया है।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेशभर से जुटे थोक विक्रेताओं ने विभिन्न समस्याएं रखीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियों द्वारा यूरिया के साथ जबरन टैगिंग की जा रही है। पॉस मशीनें नहीं चल रही हैं। हम किसानों के हित में हमेशा तत्पर हैं, लेकिन सरकारी तंत्र और कंपनियां शोषण कर रही हैं। उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय सीधे फरमान सुनाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब डेढ़ माह से कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, निदेशक पंकज त्रिपाठी संयुक्त निदेशक उर्वरक अशुतोष मिश्रा को लगातार पत्र सौंपे गए। लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।

ये हैं प्रमुख समस्याएं
- थोक विक्रेताओं के मुताबिक सरकार द्वारा यूरिया का अधिकतम विक्रय मूल्य 266.50 रुपये प्रति बोरी तय किया है। यह यूरिया थोक विक्रेताओं से फुटकर विक्रेताओं तक 275 से 285 रुपये प्रति बोरी की लागत पर पहुंच रहा है। फिर वे निर्धारित दर पर कैसे बेचें? इस मूल्य में थोक और फुटकर विक्रेता का कोई मुनाफा जुड़ा नहीं है।
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- हर वर्ष तीन से चार बार पीओएस मशीन बंद कर दी जाती है। इसे सक्रिय कराने में विक्रेताओं को 3000 से 5000 तक का खर्च वहन करना पड़ता है। यह खर्चा कहां से आएगा? क्योंकि इस खर्चे की कोई रसीद भी नहीं दी जाती है।

- कंपनियों द्वारा अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग की जा रही है। इस उत्पादन को वे कहां ले जाएं? यदि कोई विक्रेता टैग किए गए उत्पाद लेने से इंकार करता है तो उसे यूरिया ही नहीं दिया जाता।

- एक ओर कृषि विभाग विक्रेताओं को टैगिंग नहीं लेने का निर्देश दे रहा है तो दूसरी तरफ वही विभाग स्वयं इन अवांछित व कम गुणवत्ता वाले उत्पादों की बिक्री के लिए कंपनियों को अनुमति प्रदान करता है। यदि टैगिंग खत्म करनी है तो इन उत्पादों को बिक्री अनुमति न दिया जाए।

- कृषि विभाग के अधिकारी फुटकर विक्रेताओँ और थोक विक्रेताओं के यहां सैंपल लेते हैं। यह खाद लखनऊ स्थित बफर गोदाम में मौजूद रहती है। ऐसे में वहीं से सैंपल क्यों नहीं लिया जाता है?

 
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खाद की कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई : शाही

 कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि खाद की कालाबाजारी हर हाल में रोकी जाए। जहां भी मनमानी तरीके से खाद की बिक्री हो, संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। जिलों में गोदामों से लेकर फुटकर दुकानों तक की जांच की जाए। मंत्री ने बताया कि पहली अप्रैल से 12 अगस्त 2025 तक 29.52 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री हुई है। खाद की कोई कमी नहीं है। उन्होंने किसानों से अपील की कि खाद का भंडारण न करें। जितनी आवश्यकता है, उतना खाद लें। जब-जब आवश्यकता है, तब-तब खाद लें। हर जनपद में शिकायत प्रकोष्ठ है। किसी भी परेशानी की स्थिति में अवगत कराएं।
 
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