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UP: "बेटी के लिए रिश्ता तलाशने के लिए नहीं दे सकते पैरोल", जेल में बंद पूर्व मंत्री की याचिका खारिज

Sat, 28 Mar 2026 07:53 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

कोर्ट ने कहा कि नियमों में स्पष्ट रूप से ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे बच्चों की शादी तय करने के लिए पैरोल दी जा सके। पूर्व मंत्री ने बेटे व बेटी की शादी के लिए 60 दिन की पैरोल की मांग की थी।
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- फोटो : ANI
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विस्तार
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि किसी दोषी कैदी को केवल अपने बच्चों की शादी तय करने या उसके लिए प्रयास करने के आधार पर पैरोल नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि जिन कैदियों के खिलाफ अन्य आपराधिक मामले लंबित हैं, वे कानूनन पैरोल के हकदार नहीं हैं। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने हत्या मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहे पूर्व विधायक अंगद यादव की पैरोल की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।

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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह फैसला पूर्व विधायक अंगद यादव की याचिका पर दिया। याची ने राज्य सरकार के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें उसे पैरोल पर रिहा करने से इन्कार किया गया था।अंगद यादव, 1995 के एक हत्या मामले में लखनऊ के अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत से सुनाई गई उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। सजा के फैसले के खिलाफ उनकी अपीलें पहले ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी हैं।

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याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के समक्ष दो बार पैरोल की मांग की थी। पहली बार उन्होंने स्वास्थ्य और मानवीय आधार पर रिहाई की मांग की, जिसे यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि नियमों में कैदी के व्यक्तिगत इलाज के लिए पैरोल का प्रावधान नहीं है। दूसरी बार, उन्होंने 60 दिन की पैरोल मांगी, ताकि वे अपने बेटे और बेटी की शादी तय कर सकें और खेती-बाड़ी का काम देख सकें। सरकार ने यह कहते हुए यह मांग भी ठुकरा दी कि शादी की कोई तारीख तय नहीं है और केवल रिश्ते तलाशने के लिए पैरोल नहीं दी जा सकती।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने भी राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि नियमों में स्पष्ट रूप से ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे बच्चों की शादी तय करने के लिए पैरोल दी जा सके। खेती-बाड़ी के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि पैरोल तभी दी जा सकती है जब कोई अन्य विकल्प न हो। लेकिन याचिकाकर्ता के तीन वयस्क बेटे हैं। इसलिए यह माना गया कि खेती के काम के लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है। अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि नियम 1(4)(ग) के तहत जिन कैदियों के खिलाफ अन्य मामले लंबित हैं, उन्हें पैरोल नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता के खिलाफ कई गंभीर मामले लंबित हैं जिनमें हत्या के मामले भी शामिल हैं।

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