सहकारी बैंक कर्मचारी संघ के महामंत्री सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि एक अप्रैल 2021 से जिला बैंकों के कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षण हो जाना चाहिए था जो नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं, कई बैंक तो ऐसे हैं जहां 25 सालों से वेतनमान पुनरीक्षण नहीं हुआ है।
वेतन पुनरीक्षण न होने से नाराज जिला सहकारी बैंकों के कर्मचारियों ने प्रदेश भर में आंदोलन शुरू कर दिया है। पहले दिन शुक्रवार को लखनऊ के अलावा अन्य जिलों में काली पट्टी बांधकर कर्मचारियों ने कार्य किया। साथ ही चेतावनी दी है यदि उनका वेतन पुनरीक्षण नहीं हुआ तो आंदोलन लंबा चलेगा।
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सहकारी बैंक कर्मचारी संघ के महामंत्री सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि एक अप्रैल 2021 से जिला बैंकों के कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षण हो जाना चाहिए था जो नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं, कई बैंक तो ऐसे हैं जहां 25 सालों से वेतनमान पुनरीक्षण नहीं हुआ है। दरअसल इसका निर्धारण आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता स्तर पर ही पिछले 33 साल से होता रहा है। इस बार आयुक्त एवं निबंधक ने अव्यवहारिक निर्देश दिया है कि स्थानीय प्रबंध कमेटियां ही कर्मचारियों के वेतनमान का पुनरीक्षण स्वयं करें। उन्होंने कहा कि इससे एक रूपता की स्थिति समाप्त हो जाएगी। इस निर्देश से प्रदेश के सभी 13 सौ से ज्यादा सहकारी बैंकों के कर्मचारियों में असंतोष है।
इसी क्रम में गुरुवार को काली पट्टी बांधकर प्रदेश भर के सहकारी बैंकों में विरोध दर्ज कराया गया। समस्या का निदान न होने पर 13 से 15 जनवरी तक सभी जिला सहकारी बैंकों के मुख्यालयों पर प्रदर्शन होगा। 19 जनवरी को मंडलीय उपायुक्त, संयुक्त आयुक्त कार्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपें जाएंगे। बीस जनवरी को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रेस कांफ्रेंस के जरिए अपनी बात रखते हुए आगे की रणनीति से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारतीय मजदूर संघ उप्र ने भी उनके आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है।