दस्तावेजों की मदद से आरोपी ने फर्जीवाड़ा किया
मो. यूनुस ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी वर्ष 2020 में हुई, जब बैंक के रिकवरी एजेंटों की उनके पास कॉल आने लगी। उन्होंने जब खुद से जांच की तो सामने आया कि 2007 में आरोपी ने उनसे एक लोन में उन्हें गारंटर बनाने की बात कही थी। मो. मतीन ने उनसे कुछ सादे दस्तावेजों में हस्ताक्षर भी कराए थे। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों की मदद से आरोपी ने फर्जीवाड़ा किया। इसमें उसका साथ आरोपी ब्रांच मैनेजर ने भी दिया।
पीड़ित का कहना है कि आरोपी उन्हें आए दिन धमकी दे रहे हैं। मामले की शिकायत उन्होंने दो अगस्त 2020 को हजरतगंज थाने में की थी, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। थकहार कर उन्होंने कोर्ट की शरण ली। एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट लिखी गई है। हजरतगंज पुलिस पीड़ित से संपर्क कर रही है। बयान दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।