स्नान के बाद राम मंदिर के भी दर्शन करेंगे भक्त।
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प्रदेश सरकार गुरु परंपरा से जुड़े स्थलों के संरक्षण और विकास पर जोर दे रही है। आध्यात्मिक पर्यटन विकास के माध्यम से मंदिरों, आश्रमों और गुरुद्वारों को संवारा जा रहा है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करना और नई पीढ़ी को अपनी ज्ञान परंपरा से जोड़ना है।
प्रदेश में महर्षि वेदव्यास, संत रविदास और गुरु गोरक्षनाथ जैसी विभूतियों ने भारतीय संस्कृति को दिशा दी। महोबा में गोरखगिरि पर्वत पर 11.25 करोड़ की लागत से 51 फीट ऊंची गुरु गोरखनाथ की कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है। अमेठी के जायस में 5.95 करोड़ से 25 फीट ऊंची गुरु गोरखनाथ की योग मुद्रा वाली कांस्य प्रतिमा का निर्माण हो रहा है।
इसी तरह वाराणसी में संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धन धाम के पुनर्विकास पर 51.54 करोड़ खर्च किए गए हैं। देवरिया में ब्रह्मऋषि देवरहा बाबा आश्रम के पर्यटन विकास पर 2.50 करोड़ की परियोजना चल रही है। हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर स्थित गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा के पर्यटन विकास के लिए 3.63 करोड़ स्वीकृत किए हैं। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ स्थित रविदास मंदिर के लिए 229.57 लाख की धनराशि स्वीकृत हुई है।
पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गुरु पूर्णिमा गुरु परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति कृतज्ञता का अवसर है। प्रदेश सरकार संतों, ऋषियों और गुरुओं से जुड़े स्थलों के संरक्षण के साथ आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार कर रही है।