राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि भगवाकरण शब्द हिंदुत्व का नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता का प्रतीक है। उन्होंने शिवाजी के सहारे आज के नेताओं और शासकों को परिवारवाद तथा अपने व पराए की राजनीति पर आईना भी दिखाया।
नाईक शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी के साम्राज्योत्सव पर आयोजित हिंदवी स्वराज दिवस समारोह में बोल रहे थे।
शायद वजह केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया के भगवाकरण पर आक्रामक शैली के बाद बोलना ही रहा जो राज्यपाल ने भगवाकरण और हिंदवी स्वराज का अर्थ समझाने के लिए कई उदाहरण दिए।
राज्यपाल ने कहा कि लोग शिवाजी को हिंदुत्व का प्रतीक मानते हैं। वे थे भी, पर इसका मतलब यह नहीं कि वे किसी वर्ग या धर्म के विरोधी थे। उनके राज्य में कई महत्वपूर्ण पदों पर मुस्लिम ही थे।
नेपोलियन से भी बड़े योद्घा थे शिवाजी
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राज्यपाल बोले, शिवाजी भारतीय संस्कृति के अनुरूप राष्ट्र की स्थापना करना चाहते थे, जिसमें देश के प्रति आस्था रखने वाले सभी का सम्मान व स्वाभिमान सुरक्षित रहे। इसीलिए वे जब राजा हुए तो उन्होंने स्वभाषा ही नहीं बनाई बल्कि स्वराज व स्वधर्म पर भी काम किया। वे नेपोलियन से भी बड़े योद्धा थे।
नाईक ने कहा कि राम का गुणगान होता है, पर कुछ लोग यह भी कहते हैं कि राम थे या नहीं। पर, शिवाजी के बारे में कोई नहीं कह सकता कि शिवाजी नहीं थे। इसलिए आज के युग में शिवाजी को आदर्श मानकर काम करने में कुछ गलत नहीं है।
राज्यपाल ने कहा कि शिवाजी का राज्य हर विषय में मार्गदर्शन करता है। आजकल भ्रष्टाचार की चर्चा है, पर शिवाजी ने अपने पुत्र को भी जेल में डालकर बताया कि अच्छे शासक को गलत करने पर पुत्र को भी जेल में डाल देना चाहिए। आजकल हर नेता के रिश्तेदार व नजदीकी पदों पर पहुंच जाते हैं, पर शिवाजी के आठ प्रमुख प्रधानों में न तो कोई उनका रिश्तेदार था और न परिवार का या नजदीकी।
मराठी भाई 1 मई को महाराष्ट्र दिवस मनाएं
राज्यपाल ने समारोह में मौजूद मराठी समाज के लोगों से आह्वान किया कि उन्हें प्रतिवर्ष 1 मई को महाराष्ट्र दिवस मनाना चाहिए। मराठी समाज के तरफ से राज्यपाल का स्वागत भी किया गया।