टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने वाली कंपनियों के दस्तावेज से लेकर मशीनों और बैंक से जुड़े दस्तावेजों तक की पड़ताल प्रहरी करेगा। टेंडर में शामिल होने वाले आवेदक खुद सॉफ्टवेयर पर अपने दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। प्रक्रिया इतनी पारदर्शी होगी कि सभी आवेदक एक दूसरे के दस्तावेज ऑनलाइन देख सकेंगे।
सभी चीजों की पड़ताल के बाद सॉफ्टवेयर ही टेंडर के लिए कंपनियों का चुनाव भी करेगा। राज्य सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में विवादित रही स्थानीय विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी लगभग खत्म कर दी है। टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की शिकायत की जांच लोक निर्माण विभाग मुख्यालय के अधिकारियों की टीम करेगी।
कृषि भूमि के लैंड यूज चेंज को लेकर पिछली सरकारों में किसानों से होने वाली वसूली और घूसखोरी पर योगी सरकार ने रोक लगा दी है। आवास अधिनियम की धारा 143 के तहत कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में तब्दील कराने के लिए अब किसानों को न अफसरों की दहलीज के चक्कर लगाने होंगे और न बिचौलियों और दलालों का शिकार बनना होगा।
अब किसान लैंड यूज चेंज करने के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। लैंड यूज चेंज में हीला हवाली कर किसानों को परेशान करने वाले अफसरों पर भी अब राज्य सरकार की सीधी निगाह होगी। एक निश्चित समय सीमा के भीतर कोई कार्रवाई नहीं करने की स्थिति में लैंड यूज चेंज करने का आवेदन खुद अप्रूव मान लिया जाएगा।