प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) समेत अन्य सरकारी अस्पतालों को अगले माह 387 विशेषज्ञ चिकित्सक मिल जाएंगे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) से इनका चयन हो चुका है। इसमें सर्वाधिक 106 प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। इन सभी की काउंसिलिंग एक और दो नवंबर को होगी। 15 दिन में सभी की तैनाती पूरी कर दी जाएगी।
सीएचसी को प्रथम रेफरल यूनिट के रूप मे विकसित किया जा रहा है। ऐसे में यहां प्रसूति रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, बाल रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन और जनरल फिजिशियन की नियुक्ति होना जरूरी है। पर, वर्तमान में तमाम सीएचसी पर किसी न किसी विशेषज्ञ की कमी है, लेकिन नवंबर से सभी सुविधाएं बहाल हो जाएंगी।
यूपीपीएससी के जरिए एलोपैथिक विशेषज्ञ चिकित्साधिकारी (ग्रेड2) पद पर 387 चिकित्सा विशेषज्ञ का चयन किया गया है। इनमें से सर्वाधिक 106 प्रसूति रोग विशेषज्ञ, 36 निश्चेतक, 93 बाल रोग विशेषज्ञ, 73 जनरल सर्जन, 26 फिजिशियन, 34 पैथोलॉजिस्ट, 17 ईएनटी स्पेशलिस्ट और दो रेडियोलॉजिस्ट शामिल हैं। इनको विभिन्न सीएचसी पर तैनात करने के लिए एक और दो नवंबर को काउंसिलिंग होगी। इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनकी मांग के अनुसार सीएचसी पर तैनाती का आदेश जारी कर दिया जाएगा। इन्हें अधिकतम 15 दिन के अंदर कार्यभार ग्रहण करना होगा।
इस तरह होगी चिकित्सकों की तैनाती
प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 203 प्रसूति रोग विशेषज्ञों और 51 निश्चेतकों की जरूरत है। बाल रोग विशेषज्ञों को पहले 36 सीएचसी पर तैनाती दी जाएगी। इसके बाद दूसरे अस्पताल में विकल्प दिया जाएगा। जनरल सर्जन को पहले उन सीएचसी का विकल्प दिया जाएगा, जहां प्रसूति रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं। इसी तरह फिजिशियन को उन सीएचसी पर तैनात किया जाएगा, जहां प्रसूति रोग विशेषज्ञ और निश्चेतक हैं, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। जबकि पैथोलॉजिस्ट को 66 जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और संयुक्त अस्पताल का विकल्प दिया जाएगा। ईएनटी विशेषज्ञों को 30 जिला पुरुष चिकित्सालय व संयुक्त चिकित्सालय में तैनात किया जाएगा। रेडियोलॉजिस्ट के लिए पांच जिला अस्पताल का विकल्प दिया गया है।
सीएचसी को फर्स्ट रेफरल यूनिट बनाया गया है। वहां नए चिकित्सा विशेषज्ञों की तैनाती होने से मरीजों को उनके संबंधित क्षेत्र में समुचित इलाज मिलेगा। इससे जिला अस्पतालों में भीड़ कम होगी।
-डॉ. वेदब्रत सिंह, महानिदेशक स्वास्थ्य