पीडब्ल्यूडी में 300 से ज्यादा सड़कें ‘हवा’ में बनाने वालों के खिलाफ जांच रिपोर्ट से संबंधित फाइल दबा दी गई है। करीब चार साल पहले बस्ती में हुए इस घपले में अब तक सिर्फ एक दोषी एक्सईएन को बर्खास्त किया गया है। जबकि दोषी मिले दो तत्कालीन सहायक अभियंता (एई), 17 अवर अभियंता (जेई) और ठेकेदारों पर कार्रवाई पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। कुछ विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामला किसी तरह चुनावी आचार संहिता लगने तक टालने की कोशिश हो रही है।
वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए धनराशि दी गई थी। जब मौके पर काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत की। ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में हुईं थी। इस पर मुख्यालय ने उच्चस्तरीय जांच टीम से जांच कराई। जांच में करीब 40 करोड़ का फंड डायवर्जन (एक मद का दूसरे मद में खर्च करना) सामने आया। जांच टीम ने गबन की भी आशंका जताई थी।
बाद में प्रमुख अभियंता स्तर के अधिकारियों से जांच कराई गई। तब यह घपला कुल 43.95 करोड़ रुपये का निकला। इस जांच के आधार पर शासन ने फरवरी 2020 में दोषी एक्सईएन आलोक रमण की सेवाएं समाप्त कर दीं। इन्हीं आरोपों में दो एई और 17 जेई की फाइलों पर भी कार्यवाही तेज की गई। सहायक अभियंताओं पर कार्रवाई शासन को करना है और अवर अभियंताओं पर कार्रवाई मुख्यालय स्तर से होनी है। लेकिन, इन दोनों ही स्तरों पर फाइल अटक गई है।