मार्क्सवादी राजनीति के लिए कभी काफी उर्वर रही पूर्वांचल की जमीन पर वामदल एक बार फिर पांव जमाने की कोशिश कर रहे हैं। छठे और सातवें चरण में शामिल पूर्वांचल के 14 जिलों में चुनाव प्रचार के लिए दिग्गज वाम नेताओं ने डेरा डाल दिया है। वाम मोर्चे को पूरी उम्मीद है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में उनका खाता जरूर खुलेगा।
एक दौर था कि बनारस के गंगापुर (अब सेवापुरी रोहनिया) विधानसभा क्षेत्र से लगातार नौ बार वाम प्रत्याशी जीते। अकबरपुर, फैजाबाद, मेंहनगर, मऊ, पडरौना, घोसी और रसड़ा आदि क्षेत्रों से भी माकपा और भाकपा के प्रत्याशी विधानसभा में पहुंचते रहे, पर वर्ष 2002 के बाद यूपी के चुनावों में वाम दलों का खाता भी नहीं खुला।
यही वजह है कि इस बार छह वाम दलों ने न सिर्फ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया, बल्कि पूर्वांचल में पूरी शिद्दत के साथ चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।