प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों में मनमानी तरीके से आयुष्मान योजना में क्लेम से मिली राशि को खर्च नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए पहले कमेटी बनानी होगी। इस संबंध में सभी चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों को प्रमुख सचिव चिकित्सा आलोक कुमार ने निर्देश भेजा है।
आयुष्मान भारत योजना में क्लेम से मिली राशि में 25 फीसदी का उपयोग अस्पताल स्टाफ के इंसेंटिव और 75 फीसदी सुविधाओं के विस्तार एवं मानव संसाधन के विकास व उपकरणों के उच्चीकरण के लिए किया जाना है। इस राशि को खर्च करने के संबंध में सभी चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों को कमेटी बनानी है। इस कमेटी में संबंधित संस्थान के कुलपति या कॉलेज के प्रधानाचार्य को अध्यक्ष बनाया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, वित्त नियंत्रक, विभागाध्यक्ष और संबंधित जिले के जिलाधिकारी द्वारा नामित अधिकारी को सदस्य बनाया जाएगा। यह कमेटी तय करेगी कि क्लेम से मिली राशि का उपचार किस उपकरण की खरीद अथवा संसाधन बढ़ाने में करना है। इस कमेटी को 25 लाख तक के खर्च करने का अधिकार होगा। इससे अधिक की राशि के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा से अनुमति लेनी होगी। इस राशि का उपयोग किसी भी दशा में कर्मचारी के मानदेय भुगतान के लिए नहीं किया जाएगा। सिर्फ अरोग्य मित्र के मानदेय में किया जा सकेगा। कोई विशेषज्ञ चिकित्सक बुलाया जाता है तो उसे भुगतान किया जा सकेगा।