उन्होंने बताया कि इस योजना को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एमओयू हो चुका है। प्रदेश के करीब 110344 ग्रामों को योजना के अंतर्गत अधिसूचित किया गया। इनमें से गैर-आबाद ग्रामों को छोड़कर 90573 ग्रामों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। 9 मई 2025 तक करीब 1 करोड़ 6 लाख से अधिक घरौनियां तैयार की गई हैं। इनमें से 1 करोड़ 1 लाख से अधिक घरौनियों का वितरण ग्रामीणों को किया जा चुका है।
संशोधन के नियम किए गए स्पष्ट
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि घरौनी बनने के बाद समय के साथ विरासत, उत्तराधिकार, बिक्री जैसे कारणों से उनमें नाम बदलने और संशोधन की जरूरत पड़ती है, लेकिन अभी तक इसके लिए स्पष्ट नियम नहीं थे। इसी कमी को दूर करने के लिए राजस्व परिषद के प्रस्ताव पर यह विधेयक लाया गया है।
यूपी विधानसभा सत्र में सीएम योगी आदित्यनाथ।
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विधेयक में प्रावधान किया गया है कि ग्रामीण आबादी का अभिलेख घरौनी कहलाएगा, जिसमें स्वामी का नाम-पता, भूखंड का ब्योरा, क्षेत्रफल, रेखाचित्र और स्थानिक जानकारी दर्ज होगी। किसी ग्राम की सभी घरौनियों का संकलन घरौनी रजिस्टर होगा और एक अलग आबादी मानचित्र भी तैयार किया जाएगा। सर्वे और अभिलेख तैयार करने के लिए सर्वेक्षण व अभिलेख अधिकारियों और अधिसूचना जारी करने की स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है। इस कानून के तहत डीएम को हर जिले में अभिलेख अधिकारी नामित किया जाएगा।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति विवादों में कमी, अभिलेखों में पारदर्शिता, बेहतर कराधान व्यवस्था और योजनाबद्ध विकास को मजबूती मिलेगी। यह कानून ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम साबित होगा।