कोलकाता की एक बेनामी कंपनी ने लखनऊ के बक्कास इलाके में सहारा इंडिया की 200 एकड़ भूमि खरीदी और लखनऊ विकास प्राधिकरण से इंटीग्रेटेड टाउनशिप बनाने का लाइसेंस भी हासिल कर लिया। यह खुलासा रियल एस्टेट कंपनी पिनटेल की आयकर जांच के दौरान हुआ है। कंपनी के दोनों निदेशक भी बोगस मिले। पता चला है कि हवाला ऑपरेटर नंद किशोर चतुर्वेदी बेनामी कंपनी हमसफर डीलर्स के जरिए महाराष्ट्र के एक राजनीतिक घराने की काली कमाई लखनऊ में निवेश कर रहा है।
दरअसल, पिनटेल, अमरावती और एक्सेला ग्रुप की जांच के दौरान आयकर विभाग ने बीती 7 जून को कोलकाता में नंदकिशोर चतुर्वेदी की कंपनी हमसफर डीलर्स के ठिकानों पर छापा मारा था, लेकिन मौके पर कंपनी का दफ्तर नहीं मिला। इसके बाद कंपनी के निदेशक जतिंदर रिषी टंडन और अमित रमेश रिषी के आवास को खंगाला गया। जतिंदर ने बताया कि उसका नंदकिशोर से कोई कारोबारी रिश्ता नहीं है और वह केवल डमी निदेशक है। उसके ठिकानों से मिले दस्तावेजों से पता चला कि हमसफर डीलर्स ने सहारा इंडिया ग्रुप की कंपनियों से सुल्तानपुर रोड स्थित बक्कास इलाके में 200 एकड़ जमीन खरीदी और एलडीए से इंटीग्रेटेड टाउनशिप बनाने का लाइसेंस मांगा है। इसके लिए करीब 4.32 करोड़ रुपये जमा कराए जा चुके हैं। हमसफर डीलर्स ने कई कंपनियों का समूह बनाकर इसे खरीदा और बाद में जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए कंपनी का नाम ट्रू लिव होम्स कर दिया। हमसफर में नंदकिशोर के साथ महाराष्ट्र के कद्दावर राजनीतिक घराने के करीबी सदस्य निदेशक हैं और उनकी काली कमाई लखनऊ में निवेश की जा रही है। उल्लेखनीय है कि सहारा इंडिया से खरीदी गयी भूमि पिनटेल द्वारा बनाई जा रही टाउनशिप पार्क सिटी से सटी हुई है।
मनी लॉड्रिंग के जरिए आई रकम
नंदकिशोर चतुर्वेदी और उसके सहयोगियों की कंपनियों ने लखनऊ में तमाम जमीनें खरीदीं। मनी लॉड्रिंग के जरिए करीब 70 करोड़ रुपये एक एलएलपी फर्म के नाम पर मुंबई से आए थे। बता दें कि नंद किशोर चतुर्वेदी की तलाश ईडी और सीबीआई कर रही है, जांच में उसके पूरे परिवार के विदेश में पनाह लेने की जानकारी भी मिली है।
टर्नओवर भी मिला फर्जी
जांच में पता चला कि एलडीए में टाउनशिप का लाइसेंस हासिल करने के लिए कंपनी का 30 करोड़ रुपये का टर्नओवर होना जरूरी है। हमसफर डीलर्स और उसकी सहयोगी कंपनियों ने अपना टर्नओवर 350 करोड़ रुपये से अधिक दर्शाया, जबकि आयकर जांच में यह फर्जी पाया गया। कंपनी के निदेशक और शेयरधारक नंदकिशोर चतुर्वेदी के लापता होने और कंपनी में निवेश राशि कोलकाता की शेल कंपनियों से आने की वजह से आयकर विभाग ने इसे बेनामी करार दिया है।