सर्वे कार्य में अनियमितता एवं सट्टा नीति का उल्लंघन जैसे विभिन्न प्रकरणों में 69 गन्ना पर्यवेक्षकों के खिलाफ चल रही जांचों का निस्तारण कर दिया गया है। इनमें 56 गन्ना पर्यवेक्षकों पर आरोप सही पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश हुए हैं तो 13 को क्लीन चिट दे दी गई है। गन्ना एवं चीनी आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी ने बताया कि चार साल से ऐसे प्रकरणों में जांचें चल रही थीं। पर्यवेक्षकों पर शासकीय कार्यों में लापरवाही, सर्वे कार्य में अनियमितता तथा सट्टा नीति का उल्लंघन करने के आरोप थे।
इसके साथ ही विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही के साथ साथ मृतक और भूमिहीन लोगों के भी सट्टे संचालित कराने के आरोप लगाए गए थे। सबसे ज्यादा शिकायतें अनियमित सट्टों के संचालन की प्राप्त हुई थी। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होने वाले 69 गन्ना पर्यवेक्षकों के विरुद्ध जिला स्तरीय विभागीय अधिकारियों को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। वृहत जांच केबाद उन्होंने अपनी आख्या प्रस्तुत कर दी। इस सप्ताह सभी का निस्तारण कर दिया गया।
दो बर्खास्त, 32 से वसूली
दो गन्ना पर्यवेक्षकों को बर्खास्त करने के साथ साथ 13 पर्यवेक्षकों से उस धनराशि की वसूली के निर्देश दिए गए हैं जिसकी उनके कृत्य से विभाग को हानि हुई। इसके अलावा कई की वेतन वृद्घि रोकने एवं उनके कृत्य को सर्विस बुक में दर्ज करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। गन्ना आयुक्त ने कहा कि निर्दोष कर्मचारियों को को दंडित नहीं किया जाएगा, लेकिन दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पर्यवेक्षक किसी गन्ना माफिया के संपर्क में कतई न आएं। इस पर लगातार निगाह रखी जा रही है।