विशेषज्ञ केन-बेतवा लिंक परियोजना का उदाहरण दे रहे हैं। उनका कहना है कि इस परियोजना में लखनऊ कार्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों के बीच समन्वय तेजी से हो सका। यह परियोजना प्रदेश के चार जिलों बांदा, महोबा, झांसी व ललितपुर के लिए वरदान साबित हुई। ऐसे में बाकी 13 परियोजनाओं के लिए मुख्य अभियंता कार्यालय को भोपाल भेजने का फैसला समझ से परे बताया जा रहा है।