आपको उम्मीद कैबिनेट मंत्री बनने की थी, पर राज्यमंत्री पर संतोष करना पड़ा। ऐसे में गठबंधन को लेकर आप कितना संतुष्ट हैं?
गठबंधन में मिलने वाली सीटों में कितने अपने और कितने भाजपा के चुनाव चिह्न पर लड़ेंगी?
अपना दल (एस) ने आज तक एक भी चुनाव दूसरे के चिह्न पर नहीं लड़ा है। इसलिए इस चुनाव में भी गठबंधन में मिलने वाली सभी सीटों पर पार्टी अपने चुनाव चिह्न पर लड़ेगी। पार्टी के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल के समय से ही पार्टी अपने सिंबल पर चुनाव लड़ती आ रही है।
भाजपा की अब तक घोषित उम्मीदवारों की सूची में महिलाओं को मिली भागीदारी से कितना सहमत हैं?
स्वार में मुस्लिम चेहरा उतारकर अपना दल (एस) के माध्यम से भाजपा के मुस्लिम विरोधी छवि को बदलने की कोशिश तो नहीं है?
नहीं, ऐसा नहीं सोचना चाहिए। क्योंकि, अपना दल (एस) शुरू से ही मुस्लिम चेहरों को पार्टी में विभिन्न भूमिकाओं में भागीदारी देता रहा है। स्वार के पहले भी कई मुस्लिम चेहरों को विधानसभा के चुनावों में उम्मीदवार बनाया गया। पार्टी ने सादिक अली को प्रदेश अध्यक्ष तक बनाया था। हाजी मन्नान को प्रतापगढ़ की सदर सीट से उम्मीदवार बना चुके हैं। हम समाज के सभी दबे-कुचले लोगों की लड़ाई लड़ते हैं। इसमें गरीब मुस्लिम भी शामिल हैं।
यदि किसी वजह से सरकार की वापसी नहीं होती है, तो आपकी पार्टी की भूमिका क्या होगी?
यह एक काल्पनिक प्रश्न है। पहली बात तो यह है कि 10 मार्च को एक बार फिर से यूपी में राजग की सरकार बनने जा रही है। इसपर मुझे कोई संदेह नहीं है। मुझे भरोसा है कि बीते पांच साल में राजग की सरकार ने जिस प्रकार से देश व प्रदेश के विकास को लेकर काम किया है, उसकी वजह से जनता राजग को फिर से आशीर्वाद देगी। जहां तक गठबंधन का सवाल है तो वह अटूट है। हमारा गठबंधन विचारधारा को लेकर है, न कि सरकार बनने-बिगड़ने को लेकर।
चर्चा है कि कई बाहुबली आपकी पार्टी से टिकट लेने के प्रयास में हैं?
ये चर्चा बेबुनियाद है। ऐसी चर्चाओं में कोई दम नहीं है। अपना दल (एस) किसी भी अपराधी, दबंग या बाहुबली छवि के व्यक्ति को अपना उम्मीदवार नहीं बनाएगा। ऐसे लोग जानते हैं कि अपना दल में उनकी दाल नहीं गलेगी। इसलिए ऐसे लोग मुझसे संपर्क नहीं कर सकते हैं। क्योंकि, उनको मालूम है उनका प्रयास सफल नहीं होगा।
अपना दल (एस) भी कई मौजूदा विधायकों की सीट बदलने जा रहा है?
हां, मैंने सर्वे कराया था। कई विधायकों के रिपोर्ट को देखा जा रहा है। उसी के आधार पर फैसला लिया जाएगा। जीत की संभावना देखकर ही टिकट दिए जाएंगे। जरूरी हुआ तो कई लोगों के टिकट बदले भी जाएंगे।
आपकी पार्टी के बारे में अवधारणा है कि वह सिर्फ एक जाति विशेष की राजनीति करती है?