प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण की 13 वर्षों से बंद चल रहीं योजनाएं फिर शुरू कर दी हैं। इसके अंतर्गत अल्पसंख्यक समुदाय में आने वाले मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी व जैन धर्म के बेरोजगार युवक युवतियां एक लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक टर्मलोन ले सकेंगे। इसके लिए उन्हें छह फीसदी वार्षिक दर से ब्याज चुकाना होगा। इस योजना में सबसे ज्यादा लखनऊ के 60 बेरोजगारों का चयन किया जाएगा।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम और उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम के बीच 42.61 करोड़ रुपये का बीते दिनों एमओयू साइन हुआ था। निगम के महाप्रबंधक आरपी सिंह ने सभी जिलों के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को एक महीने के भीतर वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 1275 लाभार्थियों को टर्मलोन देने के लिए बजट घोषित कर दिया है।
जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय कमेटी लाभार्थियों के साथ 10 प्रतिशत लोगों की प्रतीक्षा सूची तैयार करेगी। इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बालेंदु कुमार द्विवेदी ने बताया कि ऋण वापसी पांच वर्षों में 20 समान त्रैमासिक किस्तों में की जाएगी।
यह हैं शर्तें
अल्पसंख्यक वर्ग का हो, उप्र का मूल्य निवासी हो।
पारिवारिक आय ग्रामीण 98 हजार व शहरी 1.20 लाख से अधिक न हो।
ऋण की वापसी के लिए आधार बैंक एकाउंट होना जरूरी।
आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक हो।
जो पहले योजना का लाभ ले चुके हैं, वह इसके पात्र नहीं होंगे।
विलंब भुगतान पर दो प्रतिशत अतिरिक्त दंड ब्याज देना होगा।
इन जिलों का हुआ चयन
बाराबंकी, गाजियाबाद, प्रयागराज, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, रामपुर, गोरखपुर, गोंडा, वाराणसी में 50-50 लाभार्थियों के लिये 75-75 लाख रुपये, बरेली, मुरादाबाद में 55-55 लाभार्थियों के लिये 82.50-82.50 लाख, लखीमपुर खीरी, बुलंदशहर में 45-45 लाभार्थियों के लिये 67.50-65.50 लाख रुपये, बलरामपुर, बहराइच, बागपत, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर, श्रावस्ती, सिद्घार्थनगर, संतकबीर नगर,अमरोहा, कानपुर नगर, मऊ में 40-40 लाभार्थियों को 60-60 लाख रुपये दिए गए हैं।