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Lucknow News: ट्रांसप्लांट की क्षमता बढ़ी पर अंगदान की रफ्तार अब भी धीमी

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लखनऊ। किसी की सांसें थमने के बाद भी कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। ब्रेन डेड व्यक्ति का दिल, लिवर, किडनी और आंखें किसी दूसरे परिवार के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकती हैं। लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और एसजीपीजीआई में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाएं तो लगातार बेहतर हुई हैं, लेकिन अंगदान के लिए संस्थानों ने दान प्रोत्साहन के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए।

केजीएमयू में पिछले साल दानी के परिवार के किसी एक सदस्य के लिए जीवन पर्यंत मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने का प्रस्ताव आज भी ठंडे बस्ते में है।



क्षमता 50 की, अब तक 29 कैडवरिक डोनेशन

केजीएमयू में सालाना करीब 50 कैडवरिक मल्टी ऑर्गन डोनेशन संभालने की क्षमता है। इससे 240 से अधिक जरूरतमंदों को अंग मिल सकते हैं। इसके बावजूद दिसंबर 2014 में कार्यक्रम शुरू होने से पिछले वर्ष तक यहां केवल 29 कैडवरिक मल्टी ऑर्गन डोनेशन हुए। यानी उपलब्ध क्षमता का बड़ा हिस्सा अभी इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
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अप्रैल 2025 में सड़क हादसे में ब्रेन डेड हुए 28 वर्षीय युवक के परिवार ने अंगदान की सहमति दी। उसका लिवर एक मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। यह केजीएमयू का 40वां लिवर ट्रांसप्लांट और आठवां कैडवरिक लिवर ट्रांसप्लांट था।



एक दान से मिलती है आठ जिंदगियों को उम्मीद

एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से आठ लोगों तक की जान बचाई जा सकती है। इसके लिए समय पर परिवार की सहमति, प्रशिक्षित टीम, अस्पतालों के बीच समन्वय और जरूरत पड़ने पर ग्रीन कॉरिडोर जरूरी है।



अंगदान करने वाले का चिकित्सा शुल्क होता है माफ

पीजीआई परिसर स्थित स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (एसओटीटीओ) के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि अंगदान को बढ़ावा देने के लिए एसओटीटीओ ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत ब्रेन डेड मरीज के अंगदान की सहमति देने पर उसके इलाज का खर्च माफ कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 के बाद अंगदान के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। बीते एक वर्ष में लखनऊ में पांच अंगदान हुए हैं। इनसे कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला है।
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प्रत्यारोपण में लखनऊ की बड़ी उपलब्धियां

यूपी का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट : अप्रैल 2026 में एसजीपीजीआई ने दिल्ली से एयरलिफ्ट किए गए हृदय का सफल प्रत्यारोपण किया।

20 साल बाद मल्टी ऑर्गन डोनेशन : फरवरी 2026 में एसजीपीजीआई में ब्रेन डेड मरीज की पत्नी की सहमति से मल्टी ऑर्गन डोनेशन हुआ। इससे कई मरीजों को लिवर, किडनी और कॉर्निया मिले।

किडनी प्रत्यारोपण में रिकॉर्ड : 2026 के शुरुआती महीनों में एसजीपीजीआई में 178 सफल किडनी प्रत्यारोपण हुए। इस वर्ष 250 का लक्ष्य है।
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