ट्रॉमा सेंटर में 47 घायल भर्ती किए गए। इसमें दाउदपुर मदनपुर गांव निवासी अंसार का बेटा सलाउद्दीन (20), वस्जापुर गांव के मो. सुलेमान (40), पत्नी अफरोज (35), बेटा गुलशन (12) व बेटा मेराज (10), अख्तर का बेटा गुफरान (28), शहजुद्दीन का बेटा आसिफ (22), अब्दुल हसीब की पत्नी रेहाना (25), जहीर की पत्नी शमा (24), कासिम की पत्नी आलिया (30), सगीर रजा का बेटा शाहिद (16), मीरगवां, गुरसहायगंज निवासी अलीशेर का बेटा नईमुद्दीन (45) व उसकी पत्नी पत्नी शबीना बेगम (35) और बेटा मुनीष (16), जफरुद्दीन का बेटा मजरुद्दीन (35), उसकी पत्नी अफसाना, बेटा अरमान (8), अंसार की पत्नी सुलना (40), अहसान की बेटी रेशमा (20) व बेटा दानिश (25), फहमुद्दीन खान का बेटा मो. जीशान (14) व अब्दुल कलाम (6), शरीफ खान का बेटा जाबिर (34) व उसका बेटा हसन (8), अशफाक का बेटा कलाम (17), शोले की बेटी निजाकत (8) व बेटी मुस्कान (6), पांच वर्षीय हमदान, सात वर्षीय हसन व एक साल की आसिफा, कासिम की नौ साल की बेटी नाजरीन, जुम्मन का बेटा ऐश मोहम्मद (20), जफरुद्दीन का बेटा पप्पू (40) व उसका चार साल का बेटा बिलाल, नौशाद खान का बेटा मो. उमर (16) कमरुद्दीन का 12 वर्षीय बेटा अमन, कलीम का 14 वर्षीय पुत्र कामरान, मो. मुईनुद्दीन का बेटा सबीर (10), मजरुद्दीन (40) व आफाक (8) शामिल हैं। देर रात तक नौ साल की बालिका, 45 साल के पुरुष और 35 वर्षीय महिला सहित सात लोगों की पहचान नहीं हो सकी थी।
... अरे कोई मेरी बिटिया को ढूंढ लाओ, वह हमारी गोद से छिटकर कही गिरी और हमसे बिछड़ गई। दर्द से कराह रही मां के आंसू नहीं थम रहे थे। वह होश आने पर एक बात बोल रही थी कहीं से मेरी बेटी को ढूंढ लाओ। डॉक्टर व नर्स उसका ढाढंस बंधाते हुए बेटी के सकुशल होने की बात कह रहे थे।
रेशमा का कहना है कि घटना से पहले दोनों बच्चे गोद में थे। पता नहीं मेरी लाड़ली कहां बिछड़ गई । ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने के बाद दो बच्चों के संग जख्मी रेशमा को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। उसे इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के वार्ड सी में भर्ती किया गया। रेशमा का एक साल के बेटा दानिश तो जख्मी हाल पर उसी बेड पर लेटा था।
डॉक्टर व कर्मचारियों की टीम दोनों के इलाज में जुटी थी। पर आठ माह की बिटिया अल्शिफा तलाश के बाद भी देर शाम तक नहीं मिली। रेशमा के सिर और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। हाथ में गहरे जख्म हो गए हैं। चेहरे पर भी कई जगह चोटें हैं। कूल्हे और पेट में चोट की वजह से असहनीय पीड़ा होकर बेहोश हो रही थी।
बेसुध हाल में अपने जख्मों और दर्द की परवाह किए बैगर वह ट्रॉमा सेंटर में आठ माह की मासूम बेटी की तलाश के बार-बार उठकर भाग रही थीं। जख्मी मासूम दानिश को अपनी छाती से लगाई हुई थी। एक के दानिश को भी ठीक से होश नहीं था।
ट्रॉमा सेंटरों में एक साथ घायलों के पहुंचने से व्यवस्था पटरी से उतर गई। आनन-फ ानन ऑक्सीजन सिलिंडर से गंभीर मरीजों को सांसें देने की कोशिश की गई। इसी दौरान एक सिलिंडर में रिसाव शुरू होने से वहां हड़कंप मच गया। कर्मचारियों ने तुंरत सिलेंडर वहां से हटा दिया।