मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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यूपी में अब किसानों और आम लोगों के लिए मिट्टी रॉयल्टी फ्री होगी। मिट्टी के खनन और परिवहन की समस्याओं और शिकायतों के बाद प्रदेश कैबिनेट ने उप्र. उप खनिज (परिहार) नियमावली 1963 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। मिट्टी को रॉयल्टी फ्री करने से सरकार पर करीब 300 करोड़ रुपये का राजस्व भार आएगा।
सरकार ने गत वर्ष किसानों और आम लोगों को जरूरत पर दस ट्रॉली तक मिट्टी लाने व ले जाने की अनुमति दी थी। लेकिन अनुमति के नाम पर पुलिस, लेखपाल और भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के परेशान करते थे।
इसकी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने सोमवार को सरकार की पहली वर्षगांठ के मौके पर हुए समारोह में मिट्टी को रॉयल्टी फ्री करने के साथ मिट्टी के परिवहन में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने देने की घोषणा की थी। इसी के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।
सरकार ने दावा किया है कि मिट्टी को रॉयल्टी फ्री करने से लोगों की समस्या का समाधान होगा साथ ही विकास एवं निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। साधारण मिट्टी से वित्तीय वर्ष 2016-17 में सरकार को 251.15 करोड़ रुपये की आय हुई थी। चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक मिट्टी खनन से सरकार को 244.84 करोड़ रुपये की आय हुई है। गत वित्तीय वर्ष की तुलना में सरकार को फरवरी 2018 तक सभी प्रकार के उप खनिजों की रॉयल्टी से 1156 करोड़ रुपये की आय हुई है।
वाराणसी में खुलने वाले केंद्रीय विद्यालय के लिए सरकार ने हवाई पट्टी की आरक्षित जमीन देने का फैसला किया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। फैसले के मुताबिक वाराणसी में कटेसर परगना के भंदहा कला गांव में हवाई पट्टी के नाम दर्ज 4.2 हेक्टेयर भूमि माध्यमिक शिक्षा विभाग को निशुल्क दी जाएगी।
लघु सिंचाई विभाग के अभियंताओं के लिए नियमावली में संशोधन
लघु सिंचाई विभाग में कार्यरत अवर अभियंताओं के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट बैठक में उप्र. अधीनस्थ अभियंत्रण सेवा नियमावली-2009 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया। वेतन समिति -2008 की विशेष उपकरण संवर्ग में कार्यरत कार्मिकों के संबंध में की गई संस्तुति के अनुसार, अधीनस्थ अभियंत्रण सेवा नियमावली-2009 में प्रथम संशोधन किया गया है। इससे अवर अभियंताओं की सेवा शर्तें बेहतर होंगी।
लघु सिंचाई विभाग के अभियंताओं के लिए नियमावली में संशोधन
लघु सिंचाई विभाग में कार्यरत अवर अभियंताओं के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ अभियंत्रण सेवा नियमावली-2009 में संशोधन के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी। यहां बता दें कि लघु सिंचाई विभाग की वर्ष 1964 में स्थापना हुई थी। वेतन समिति -2008 की विशेष उपकरण संवर्ग में कार्यरत कार्मिकों के संबंध में की गई संस्तुति के अनुसार, अधीनस्थ अभियंत्रण सेवा नियमावली-2009 में प्रथम संशोधन किया गया है। इससे अवर अभियंताओं की सेवा शर्तें बेहतर होंगी।
कैबिनेट ने निदेशक सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास की संविदा अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही मौजूदा निदेशक, सैनिक कल्याण ब्रिगेडियर (अवकाश प्राप्त) अमूल्य मोहन की संविदा अवधि भी 12 सितंबर 2018 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
भारत सरकार रक्षा मंत्रालय, पुनर्वास महानिदेशालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, निदेशक सैनिक कल्याण के पद पर ब्रिगेडियर या समकक्ष स्तर के सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्त संविदा के आधार पर की जाती है। इंटरव्यू के आधार पर पहले एक वर्ष के लिए नियुक्ति बोती है। कार्य संतोषजनक पाए जाने पर एक-एक वर्ष का और सेवा विस्तार दिया जाता है।
हालांकि, अभी तक यह अवधि 60 वर्ष की उम्र तक ही बढ़ाए जाने का नियम है। केंद्र सरकार ने निदेशक, सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास की अधिकतम पद धारण करने की अवधि नियुक्ति की तिथि से 5 वर्ष या 62 वर्ष (जो पहले हो) करने का प्रावधान किया है। इस प्रावधान को देखते हुए यूपी में भी इस पद पर कार्यकाल 5 वर्ष या 62 वर्ष तक करने का प्रस्ताव लाया गया था, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट ने केंद्र सरकार की सब्सिडी से लोगों को वितरित हो रहे मिट्टी तेल (कोटे की दुकानों से वितरित होने वाले) के वन टाइम लाइसेंस व्यवस्था मंजूरी दे दी है। साथ ही सरकार ने इसका गजट प्रकाशन करा दिया है। दरअसल, 1994 में प्रदेश सरकार ने मिट्टी तेल नियंत्रण अधिनियम में संशोधन करते हुए रियायती मिटटी तेल के लिए वन टाइम लाइसेंस व्यवस्था को लागू किया था।
संशोधन में लिखा था कि इसका गजट में प्रकाशन होने की तारीख से इसे लागू किया जाएगा। पर, किन्हीं कारणों से इसका गजट का प्रकाशन नहीं हो पाया जबकि वन टाइम लाइसेंस की व्यवस्था लागू की गई है। इसी को लेकर कुछ लोगों ने न्यायालय में याचिका दायर कर दी। न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए इस पर आपत्ति व्यक्त की।
नतीजतन, प्रदेश सरकार को इस संशोधन को मंजूरी देनी पड़ी। खाद्य-रसद विभाग ने मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्ताव रखा था कि संशोधन के सिलसिले में गजट प्रकाशन करा दिया गया है। विभाग ने कैबिनेट से इस व्यवस्था को लागू रखने और पूर्व बने लाइसेंसों को भी वैध करार देने की सिफारिश की थी। जिसे मंजूरी दे दी गई।
प्रदेश कैबिनेट ने बुलंदशहर व रायबरेली में निवेश करने वाली दो औद्योगिक इकाइयों को उत्पादन शुरू करने पर औद्योगिक निवेश नीति के तहत 317.12 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ देने की मंजूरी दे दी है। सपा शासनकाल में अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 के तहत श्री सीमेंट ने बुलंदशहर में और रिलायंस सीमेंट कंपनी ने रायबरेली में मेगा प्रोजेक्ट की स्थापना की थी।
नीति के तहत इन इकाइयों को विभिन्न तरह की वित्तीय सुविधाओं के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए गए थे। इन कंपनियों ने तय निवेश व वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने के बाद सरकार से वित्तीय सुविधाएं स्वीकृत करने की मांग की थी। इस पर कैबिनेट ने श्री सीमेंट को 110.76 करोड़ व रिलायंस सीमेंट को 206.36 करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ देने को मंजूरी दे दी है।