ग्रामीणों से बात करते पुलिसकर्मी।
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सुजीत किसी प्रकार तालाब से सही सलामत बचकर निकलने में कामयाब रहा, लेकिन तुलसी, शोभी व संतोष पानी में डूब गए। सही सलामत बचकर बाहर निकले सुजीत ने किसी प्रकार गांव पहुंचकर लोगों को जानकारी दी तो हड़कंप मच गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
इस बीच जानकारी होते ही कोतवाली प्रभारी बृजेश पाण्डेय भी रात में ही पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। अंधेरा होने के चलते रात में तीनों की तलाश नहीं की जा सकी। शनिवार भोर में पुलिस टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर तलाश शुरू की तो तीनों शव बरामद हो गए। शव देखते ही परिवारीजनों में कोहराम मच गया। किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि किस प्रकार पीड़ित परिवार को सब्र बंधाएं बाद में पुलिस ने तीनों शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
शुभि व तुलसी के घर से शनिवार को रह-रहकर चीत्कार सुनाई देती रही। शुभि की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। दरअसल दो वर्ष पहले ही शुभि का विवाह हुआ था। उसके कोई बच्चे भी नहीं हैं। ग्रामीणों की समझ में नहीं आ रहा था कि किस प्रकार शुभि की पत्नी, मां व पिता को समझाएं। कुछ ऐसा ही माहौल तुलसी के घर भी रहा। करीब तीन वर्ष पूर्व ही तुलसी का विवाह हुआ था। उसके एक पुत्री है।
एडीएम ने मदद का दिलाया भरोसा
जानकारी होते ही एडीएम पंकज कुमार वर्मा एसडीएम टांडा एमपी सिंह व तहसीलदार संतोष कुमार ओझा के साथ पहले घटनास्थल पर पहुंचे। जायजा लेने के बाद गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। एडीएम ने सब्र बंधाते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में वे सभी उनके साथ खड़े हैं। जो भी स्थानीय व शासन स्तर पर मदद हो सकती है दिलाई जाएगी।