सूत्र बताते हैं कि प्रदेश के इतिहास में यह ऐसा संयोग पहली बार घटा है जब विधानसभा के गठन के तीन साल के भीतर ही न्यायालय के फैसले की गाज अब तक तीन विधायकों पर गिर चुकी है। इन्हें विधानसभा की सदस्यता से हाथ धोना पड़ा है।
टूंडला का मामला भी न्यायालय में विचाराधीन है। इस सीट से 2017 में भाजपा के डॉ. एस.पी. सिंह बघेल विधायक चुने गए थे। बघेल के जाति प्रमाण पत्र के खिलाफ न्यायालय में मामला दायर किया गया था। जो अभी विचाराधीन है।