फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंत्रिमंडल विस्तार: अवध व बुंदेलखंड की एससी आबादी को लामबंद रखने की कोशिश, ब्राह्मणों को भी साधा

Thu, 08 Jul 2021 09:48 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री मोदी ने अवध व बुंदेलखंड को लामबंद करने के साथ ही राजनीतिक समीकरणों को साधने का प्रयास किया है। वहीं, मोदी मंत्रिमंडल में प्रदेश से दो ब्राह्मण चेहरे शामिल किए गए हैं।

 
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में लखनऊ से लगी मोहनलालगंज संसदीय सीट से दूसरी बार सांसद कौशल किशोर और जालौन से पांचवी बार के सांसद भानुप्रताप वर्मा को शामिल कर अवध व बुंदेलखंड क्षेत्र की एससी आबादी को भाजपा के साथ लामबंद रखने की कोशिश की गई है।

विज्ञापन


हरजीत सिंह पुरी को तरक्की देकर रुहेलखंड से लेकर लखनऊ, कानपुर सहित कई शहरों में मौजूद सिख मतदाताओं को पार्टी के साथ और मजबूती से जोड़ने की कोशिश की गई है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चंदौली से सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के बाद लखीमपुर खीरी से दूसरी बार सांसद अजय मिश्र टेनी को भी विस्तार में जगह दी गई है।

इस प्रकार मोदी मंत्रिमंडल में प्रदेश से दो ब्राह्मण चेहरे हो गए हैं। कहा जा रहा है कि पिछले दिनों प्रदेश के ब्राह्मणों में भाजपा को लेकर नाराजगी की खबरों को देखते हुए भाजपा हाईकमान ने यह फैसला किया है ।
विज्ञापन


महिला समीकरण: अनुप्रिया पटेल को मंत्रिमंडल में शामिल करने के बाद प्रदेश से अब तीन महिलाएं मोदी की कैबिनेट में हो गई हैं। अनुप्रिया से पहले अमेठी से सांसद स्मृति ईरानी तथा फतेहपुर से सांसद साध्वी निरंजन ज्योति ही केंद्र सरकार में मंत्री थीं।

Trending Videos
विज्ञापन

मंत्रियों के लिए भी कठिन चुनौती

जिन चेहरों को जगह मिली है उन्हें एक तरह से यह संदेश भी दे दिया गया है कि उन्हें अपनी भूमिका पर खरा उतरना होगा। अपने-अपने वर्गों के बीच पकड़ व पहुंच को साबित कर खुद की प्रासंगिकता को भी प्रमाणित करना होगा। जिस तरह प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल से कई वरिष्ठ मंत्रियों, खासतौर से बरेली सीट से कई बार के सांसद संतोष गंगवार की छुट्टी की है, उससे यह बता दिया है कि खुद को साबित करने के अलावा इन सबके सामने कोई विकल्प नहीं है। साबित न कर पाए तो नया रुतबा बरकरार नहीं रह पाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें